उत्तर प्रदेश पुलिस की आईपीएस अधिकारी अनुकृति शर्मा को उनकी उल्लेखनीय पुलिसिंग और बड़े अंतरराज्यीय बीमा घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक से सम्मानित किया जाएगा। संभल में तैनाती के दौरान उन्होंने 100 करोड़ रुपये से अधिक के बीमा घोटाले का खुलासा कर देश के 12 राज्यों तक फैले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 31 अक्टूबर को वर्ष 2026 के लिए देशभर के 490 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को इस सम्मान के लिए चुने जाने की घोषणा की थी। इसी सूची में उत्तर प्रदेश कैडर की 2020 बैच की आईपीएस अधिकारी अनुकृति शर्मा का नाम भी शामिल है। इस बड़े घोटाले की कहानी 17 जनवरी 2025 को शुरु हुई, जब संभल जिले के रजपुरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध वाहन को रोका। वाहन की तलाशी में 11.45 लाख रुपये नकद, 19 एटीएम कार्ड और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए। शुरुआत में तो यह सामान्य जांच का मामला लग रहा था, लेकिन पुलिस ने बरामद सामग्री और दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल शुरु की। जांच के दौरान एक मोबाइल फोन से एक लाख से अधिक तस्वीरें और लगभग 30 हजार दस्तावेज मिलने से पुलिस को बड़े संगठित गिरोह के सक्रिय होने का पता चला।

तत्कालीन एएसपी दक्षिणी अनुकृति शर्मा के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ी और धीरे-धीरे इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट की कई परतें खुलती चली गईं। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। इसमें जीवित लोगों को सरकारी अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों में मृत दर्शाकर उनके नाम पर बीमा क्लेम हासिल करने का खेल शामिल था। पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया कि गिरोह के कुछ सदस्य बीमा की बड़ी रकम हासिल करने के लिए हत्या तक की साजिश रचते थे और घटनाओं को सड़क दुर्घटना का रुप देने का प्रयास करते थे। इस पूरे नेटवर्क में कथित तौर पर बीमा एजेंटों, बैंक कर्मचारियों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों की भूमिका भी उजागर हुई।

जांच का दायरा बढ़ने के साथ पता चला कि यह गिरोह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के 12 राज्यों में इसका नेटवर्क फैला हुआ था। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया। संभल सहित पांच जिलों में इस मामले से संबंधित 27 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए और अब तक 74 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। घोटाले की कुल रकम 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई। अनुकृति शर्मा की पहचान केवल बड़े आपराधिक मामलों की जांच तक सीमित नहीं रही। संभल में तैनाती के दौरान उन्होंने पुलिस और आमजन के बीच विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से ‘पुलिस माई फ्रेंड’ अभियान शुरु किया था।इसके अलावा जिले के सभी 15 थानों में महिलाओं और बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए क्रेच की व्यवस्था कराई गई थी। इन पहलों के लिए उन्हें डीजी प्रशंसा चिह्न (सिल्वर मेडल) से भी सम्मानित किया जा चुका है।

आईपीएस अनुकृति शर्मा का शैक्षणिक और पेशेवर सफर भी चर्चा में रहा है। पुलिस सेवा में आने से पहले उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की और अमेरिका में शोध कार्य से जुड़ी रहीं। नासा से संबंधित परियोजना में भी उनका योगदान रहा। बाद में उन्होंने विदेश में शोध का रास्ता छोड़कर सिविल सेवा में आने का निर्णय लिया और यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर आईपीएस अधिकारी बनीं। वर्ष 2020 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी अनुकृति शर्मा वर्तमान में गौतमबुद्धनगर (नोएडा) पुलिस कमिश्नरेट में अपर पुलिस उपायुक्त के पद पर तैनात हैं। संभल में उनके नेतृत्व में सामने आए बीमा घोटाले की जांच और संगठित अपराध के नेटवर्क का पर्दाफाश उनकी पुलिस सेवा की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक के लिए चयन को उनके इसी कार्य का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान माना जा रहा है। यह उपलब्धि पुलिस अधिकारियों के लिए पेशेवर दक्षता, वैज्ञानिक विवेचना और संगठित अपराध के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की अहमियत भी रेखांकित करती है।
