ऐतिहासिक रामलीला के छठवें दिन रविवार की रात नगर में धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण के बीच रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मनोहारी मंचन किया गया। नगर के अलग-अलग रामलीला मंचों पर कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस दौरान गूंजते ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से पूरा वातावरण राममय हो उठा। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

नगर के नई आबादी स्थित रामलीला मंच पर तीन दिवसीय स्थानीय रामलीला मंचन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि क्षेत्राधिकारी प्रतिमा वर्मा तथा समिति के अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल सहित अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भगवान श्रीराम की आरती कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद लीला व्यास योगेश महाराज के निर्देशन में आदर्श राशेश्वरी रामलीला मंडली के कलाकारों ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का सजीव मंचन प्रस्तुत किया। मंचन के दौरान भरत के चित्रकूट गमन और निषादराज के क्रोध से जुड़े प्रसंगों में भरतजी के प्रभु श्रीराम से मिलने के लिए चित्रकूट जाने तथा निषादराज के साथ उनके संवाद को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। भरत-भारद्वाज संवाद के माध्यम से संत भारद्वाज से भेंट और भाई भरत के प्रेम को लेकर लक्ष्मणजी के मन में उत्पन्न रोष का भावपूर्ण अभिनय किया गया।

रामलीला का सबसे भावुक प्रसंग भरत-राम मिलाप रहा। जब भरतजी और प्रभु श्रीराम का मिलन हुआ तो भाईचारे, त्याग, प्रेम और समर्पण की भावना से दर्शक भावविभोर हो उठे। इसके बाद जनक सभा और प्रभु श्रीराम की चरण पादुका को सिर पर धारण कर भरतजी के अयोध्या लौटने की लीला का मनोहारी मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से प्रसंगों की धार्मिक और भावनात्मक महत्ता को जीवंत कर दिया।
