उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज हो गए हैं। कांते सायन्ना और ओंकार नाथ चौरसिया के नामांकन पत्रों में निर्धारित संख्या में विधायकों के प्रस्तावक संबंधी जरुरी औपचारिकताएं पूरी नहीं थीं। इसके चलते दोनों के नामांकन निरस्त कर दिए गए।

प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने तक कुल 12 उम्मीदवारों ने पर्चे दाखिल किए थे। इनमें भाजपा के आठ, समाजवादी पार्टी के दो और दो निर्दलीय उम्मीदवार शामिल थे। जांच के बाद दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने से अब मैदान में 10 उम्मीदवार ही रह गए हैं। निर्वाचन अधिकारी के अनुसार निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों में 10 विधायकों के अनिवार्य हस्ताक्षर नहीं थे। इसी आधार पर जांच के दौरान दोनों पर्चे निरस्त किए गए।भाजपा ने राज्यसभा की आठ सीटों के लिए धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी मैदान में हैं।

चूंकि 10 सीटों के मुकाबले अब 10 ही वैध उम्मीदवार बचे हैं, इसलिए फिलहाल इन सभी का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगी। राज्यसभा चुनाव के कार्यक्रम के अनुसार 9 अक्टूबर नाम वापसी की अंतिम तारीख है। यदि इस अवधि में कोई उम्मीदवार नाम वापस नहीं लेता है तो निर्वाचन अधिकारी 10 प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा करेंगे। ऐसी स्थिति में 16 अक्टूबर को मतदान कराने की जरुरत नहीं पड़ेगी। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इन्हीं रिक्त होने वाली सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव की प्रक्रिया शुरु की गई है।

नामांकन के अंतिम दिन तक 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवार होने से मुकाबले की संभावना बनी हुई थी। दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के बाद अब भाजपा के आठ और सपा के दो उम्मीदवार ही वैध प्रत्याशियों के रुप में बचे हैं, जिससे राज्यसभा चुनाव में मतदान और क्रॉस-वोटिंग की संभावित स्थिति फिलहाल खत्म हो गई है।
