उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्यसमिति की एक महिला सदस्य द्वारा पार्टी जिलाध्यक्ष समेत चार लोगों पर लगाए गए गंभीर आरोपों से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। महिला का आरोप है कि निजी वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसका कथित तौर पर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण किया गया। महिला के आरोपों से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो और उसमें लगाए गए आरोपों की पुष्टि समाचार एक्सप्रेस लाइव नहीं करता।

मामला बांसडीह क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार महिला ने भाजपा के जिला महामंत्री आलोक सिंह मोनू, गणेश गुप्त और अजीत मिश्र चंदन समेत चार लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि उसकी निजी सामग्री कथित तौर पर प्रसारित की गई और उसे वायरल करने की धमकी देकर दबाव बनाया गया। मामले में महिला की शिकायत पर बांसडीह कोतवाली में तीन लोगों के खिलाफ निजी वीडियो को कथित रुप से प्रसारित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस के अनुसार, शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी अनुमति के बिना निजी वीडियो डिजिटल माध्यम से प्रसारित किया गया, जिससे उसकी निजता और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। पुलिस इस मामले में वीडियो के स्रोत, उसके प्रसारण और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।

महिला का आरोप है कि उसने भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्र का नाम भी अपनी शिकायत में लिया था, लेकिन प्रभाव के चलते उनका नाम प्राथमिकी में शामिल नहीं किया गया। हालांकि, दर्ज प्राथमिकी में जिलाध्यक्ष का नाम नहीं है और उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्पष्ट रुप से खारिज किया है।मामले में महिला ने एक अक्तूबर को सीजीएम अदालत में शपथपत्र देकर अपनी शिकायत और आरोपों को सामने रखा। जिसमें महिला ने निष्पक्ष जांच, चिकित्सीय परीक्षण और न्यायालय के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने की मांग की है। अदालत की ओर से विवेचक को मामले की निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।

महिला का आरोप है कि पुलिस ने अब तक उसका अपेक्षित बयान दर्ज नहीं किया और इसी कारण उसने अदालत का रुख किया। वहीं पुलिस का कहना है कि पूर्व में दर्ज प्राथमिकी की जांच चल रही है और डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है। उधर, भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्र ने महिला के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने घटना को निराधार बताते हुए अपने खिलाफ बदनाम करने की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि पूरे मामले की सच्चाई जांच में सामने आएगी और यदि किसी ने उन्हें फंसाने अथवा उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा है कि महिला भाजपा की जिला कार्यकारिणी की सदस्य है और संगठन में महिला मोर्चा से जुड़े पद को लेकर भी विवाद की पृष्ठभूमि हो सकती है।
फिलहाल, महिला के आरोपों वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। भाजपा से जुड़े अलग-अलग पक्षों की ओर से सोशल मीडिया पर दावे और प्रतिदावे किए जा रहे हैं। भाजपा के गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद कुमार राय ने भी मामले पर नजर रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यदि किसी को गलत तरीके से फंसाने का प्रयास हुआ है तो वह भी उचित नहीं है। इस पूरे मामले में एक ओर महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप और अदालत में दिए गए शपथपत्र हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा जिलाध्यक्ष का आरोपों से साफ इनकार है। पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
