डिजिटल दौर में टैक्स चोरी और अघोषित संपत्ति से जुड़े मामलों की जांच को और मजबूत करने के लिए देशभर में 22 डिजिटल इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स लैब स्थापित करने की तैयारी है। उपलब्ध टेंडर रिकॉर्ड के मुताबिक इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 73.46 करोड़ रुपये है और इसमें भोपाल, लखनऊ, कानपुर समेत 22 शहरों में लैब स्थापित करने का प्रावधान है।

इन लैब के जरिए जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाया जाएगा। मोबाइल फोन, लैपटॉप और हार्ड डिस्क के साथ ई-मेल, क्लाउड स्टोरेज, सर्वर तथा वित्तीय सॉफ्टवेयर से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकेगी।डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच में डिलीट किए गए डाटा की रिकवरी भी महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि टैक्स चोरी या अघोषित संपत्ति से संबंधित कोई डिजिटल रिकॉर्ड हटाया या बदला गया है या नहीं। हालांकि डाटा रिकवरी की तकनीक जांच एजेंसियों के लिए पहले से उपलब्ध रही है, नई लैब के जरिए इस क्षमता को संस्थागत और अधिक आधुनिक बनाने की योजना है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी की ओर से इन लैब की स्थापना, आपूर्ति, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरु की गई है। मौजूदा टेंडर में 22 लैब का उल्लेख है। प्रस्तावित 22 स्थानों में दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, भोपाल, जयपुर, चंडीगढ़, लुधियाना, पटना, रायपुर, मुंबई, पुणे, नागपुर, हैदराबाद, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई, कोच्चि, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, पणजी, कानपुर और लखनऊ शामिल हैं।
आयकर विभाग पहले से ही डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल सूचनाओं के इस्तेमाल के जरिए कर अनुपालन तथा राजस्व चोरी की पहचान की दिशा में काम कर रहा है। नई डिजिटल फॉरेंसिक क्षमता से जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है।
