सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हिरासत में लेते ही शुरू होगी 24 घंटे की उलटी गिनती, गिरफ्तारी दर्ज करने में देरी नहीं चलेगी

पुलिस की औपचारिक गिरफ्तारी के समय से नहीं, व्यक्ति की वास्तविक स्वतंत्रता छीने जाने के समय से होगी गणना

Akhlaque Khan
Akhlaque Khan Published on : November 5, 2026 4:33 am
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हिरासत में लेते ही शुरू होगी 24 घंटे की उलटी गिनती, गिरफ्तारी दर्ज करने में देरी नहीं चलेगी
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नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पुलिस की जवाबदेही को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद उसकी औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज करने में देरी करके 24 घंटे की संवैधानिक समयसीमा को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। गिरफ्तारी और हिरासत के बीच कृत्रिम अंतर बनाकर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक पुलिस नियंत्रण में रखना संविधान की भावना के विपरीत है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(2) के तहत किसी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है। इस अवधि की गणना उस समय से की जाएगी, जब व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता वास्तव में प्रतिबंधित कर दी जाती है। हालांकि, गिरफ्तारी स्थल से मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचने में लगने वाला आवश्यक यात्रा समय इसमें शामिल नहीं होगा। अदालत के इस रुख का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुलिस किसी व्यक्ति को पहले हिरासत में रखकर बाद में गिरफ्तारी दिखाने की प्रक्रिया अपनाकर संवैधानिक सुरक्षा को निष्प्रभावी नहीं कर सकती। यानी गिरफ्तारी के दस्तावेजों में दर्ज समय ही हर परिस्थिति में निर्णायक नहीं होगा। वास्तविक परिस्थितियों और व्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगे प्रतिबंध को भी ध्यान में रखा जाएगा।

अनुच्छेद 22(2) नागरिकों को मनमानी हिरासत से बचाने के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार प्रदान करता है। इसके तहत निर्धारित अवधि से अधिक किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना हिरासत में नहीं रखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पुलिस की कार्यप्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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