समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को निर्धारित समय से करीब पांच घंटे की देरी से रात लगभग साढ़े नौ बजे वाराणसी के करखियांव पहुंचे। उनके आगमन को लेकर देर रात तक पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सैकड़ों की संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने गगनभेदी नारों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। देर से पहुंचने के बावजूद कार्यकर्ताओं का जोश कम नहीं हुआ और अखिलेश यादव को अपने बीच पाकर समर्थकों में खासा उत्साह दिखाई दिया।

करखियांव पहुंचने पर अखिलेश यादव ने करीब आधे घंटे तक पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज के नवनिर्मित आवास पर पहुंचे, जहां करीब आधे घंटे तक रुके। उनके बाहर निकलते ही कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। भीड़ का उत्साह देखते हुए पुलिसकर्मियों को व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान जौनपुर के साथ वाराणसी के बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पिंडरा विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ता भी देर रात तक करखियांव स्थित सांसद प्रिया सरोज एवं केराकत विधायक तूफानी सरोज के आवास पर डटे रहे।

वाराणसी प्रवास के बाद अखिलेश यादव ने काशीवासियों के नाम एक राजनीतिक संदेश जारी कर हालिया चुनावी जीत को भाजपा के खिलाफ जनता का स्पष्ट संदेश बताया। उन्होंने कहा कि काशी ने आशुतोष सिन्हा और लाल बिहारी यादव को ऐतिहासिक वोटों से जिताकर समाजवादी पार्टी को दोहरा आशीर्वाद दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि काशी ने डबल इंजन की सरकार को डबल जीरो कर दिया है। अखिलेश यादव ने इस जीत के पीछे कई स्थानीय मुद्दों को निर्णायक बताते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मणिकर्णिका घाट के पौराणिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाने, राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा के कथित तिरस्कार और शंकराचार्य के साथ हुए व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर काशी की जनता ने अपना जवाब दिया है।

सपा प्रमुख ने वाराणसी के पारंपरिक कारोबार और स्थानीय लोगों की आजीविका का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बनारस के बुनकरों की स्थिति खराब है, हस्तकला का कारोबार प्रभावित हुआ है और नाव चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले लोग भी परेशान हैं। दालमंडी के कारोबारियों के साथ हुए व्यवहार को लेकर भी उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की कथित कमीशनखोरी और बाहर के ठेकेदारों को प्राथमिकता देने की नीति से छोटे कारोबारियों का नुकसान हुआ है। नमामि गंगे परियोजना के बजट और गंगा की स्वच्छता को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मां गंगा के नाम पर किए गए वादे पूरे नहीं हुए।अखिलेश यादव ने क्योटो मॉडल को लेकर भी भाजपा पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि क्योटो तो बनाया नहीं, काशी को भी उजाड़ दिया। अगर क्योटो नहीं बना पाए तो कम से कम उसका फोटो ही लगा देते। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने बनारस का हित करने के बजाय उसका अहित किया है।

अखिलेश यादव ने अपने संदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा राजनीतिक दावा किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता विदाई करना जानती है, लेकिन जब काशी विदाई करती है तो वह स्थायी होती है। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि इस बार काशी भाजपा की उदासी का कारण बनेगी और 2027 में बनारस की प्रसिद्ध लौंगलता समाजवादियों का मुंह मीठा करेगी। उन्होंने वादा किया कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर वाराणसी को ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए मेट्रो का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही आधुनिक तकनीक के माध्यम से धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण करते हुए विकास को आगे बढ़ाने की बात कही। अखिलेश यादव ने कहा कि काशी का गौरव वापस लाना समाजवादी पार्टी का संकल्प है। अपने संदेश का समापन उन्होंने ‘भाजपा जाएगी, काशी मुस्कुराएगी’ के नारे के साथ किया।

इस दौरान सांसद प्रिया सरोज, केराकत विधायक तूफानी सरोज, एमएलसी लालबिहारी यादव, विधायक लकी यादव, जिलाध्यक्ष सुजीत यादव लक्कड़, रविंद्र यादव गुड्डू, पूर्व विधायक लालबहादुर यादव, रामबचन यादव, प्रदेश सचिव कमलेश यादव, पिंडरा विधानसभा अध्यक्ष मनोज यादव, केराकत विधानसभा अध्यक्ष नीरज पहलवान, ब्लॉक अध्यक्ष वंशलाल पटेल, फूलचंद यादव, डॉ. विनोद भास्कर, संजय यादव, श्रीनाथ पटेल और प्रदीप वर्मा सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
