पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ निलंबित, महकमे में मचा हड़कंप

पुलिस और वकीलों के बीच विवाद के बाद एसीपी और एसएचओ के तबादले के विरोध में सड़कों पर उतरे थे पुलिसकर्मी

Akhlaque Khan
Akhlaque Khan Published on : November 4, 2026 3:08 am
पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ निलंबित, महकमे में मचा हड़कंप
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पुलिस अधिकारियों के तबादले के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस महकमे में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से दिल्ली पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है।

दरअसल, शाहदरा इलाके में पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और संबंधित थाने के एसएचओ का तबादला कर दिया गया था। इस फैसले से पुलिसकर्मियों के एक वर्ग में नाराजगी थी। उनका मानना था कि विवाद के मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई उचित नहीं है। नाराजगी के चलते सोमवार को बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। शाहदरा थाने में हुए विवाद के दौरान अधिवक्ता ललित बंसल को कथित तौर पर गंभीर चोट लगने का मामला सामने आया था। इसके बाद वकीलों ने पुलिस की कार्रवाई और अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए विरोध शुरु कर दिया था। दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन न्यायिक कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया था।

वकीलों की मांगों और पुलिस प्रशासन के साथ हुई बातचीत के बाद 28 अक्टूबर को दोनों पुलिस अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए गए। इसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली। हालांकि, अधिकारियों के तबादले से पुलिस विभाग के एक वर्ग में नाराजगी फैल गई। अपने अधिकारियों के तबादले के विरोध में सोमवार को दिल्ली पुलिस के करीब 100 से 150 पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर एक के बाहर एकत्र हुए। धीरे-धीरे प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ गई। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, बाद में पुलिस कमिश्नर के साथ हुई बैठक में करीब 500 पुलिसकर्मी शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार को उनके पुराने पदों पर बहाल करने की मांग उठाई। पुलिसकर्मियों का कहना था कि पुलिस अधिकारियों के सम्मान, कार्यस्थल की सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने वर्दी के सम्मान और पुलिस एकता से जुड़े नारे भी लगाए। खास बात यह रही कि इस बार पुलिसकर्मी किसी दूसरे विभाग या संगठन के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने ही विभाग के प्रशासनिक फैसले के विरोध में मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। उनकी प्रमुख मांगों में वकीलों से जुड़े विवादों से निपटने के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाना, पुलिसकर्मियों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग तंत्र विकसित करना, पुलिस थानों और अदालत परिसरों में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा शाहदरा प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई करना शामिल था।

पुलिस कमिश्नर ने पुलिसकर्मियों की समस्याएं सुनीं और उनके मनोबल तथा वर्दी के सम्मान को बनाए रखने की बात कही। दिल्ली पुलिस की ओर से इस बैठक को संपर्क सभा बताया गया, जिसमें विभिन्न रैंक के पुलिसकर्मियों से संवाद किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निलंबन का आदेश जारी कर दिया। आदेश में उनके खिलाफ लंबित विभागीय कार्यवाही का उल्लेख किया गया है। हालांकि, निलंबन के आदेश में विभागीय कार्रवाई के विस्तृत आरोपों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय दिल्ली निर्धारित किया गया है। सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना वह मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

निलंबन की खबर सामने आने के बाद मनस्वी वशिष्ठ ने एक वीडियो संदेश में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निलंबन कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। यह विभागीय कार्रवाई है और उन्हें व्यवस्था पर पूरा भरोसा है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी तथा उचित निर्णय आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे उनका मनोबल प्रभावित नहीं हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली पुलिस के भीतर अधिकारियों और कर्मचारियों की नाराजगी, पुलिस-वकील संबंधों तथा विभागीय शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें शाहदरा प्रकरण की जांच और एसीपी के खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही पर टिकी हैं।

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