देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को विपक्षी गठबंधन INDIA ने चुनावी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध में बड़ा प्रदर्शन किया। रामलीला मैदान में आयोजित इस रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों समेत गठबंधन के कई घटक दलों के नेता और हजारों समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नाम दिया गया।

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने की मांग उठाई। रैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए।

नेताओं ने मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक झंडे एवं बैनर लेकर शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। वहीं चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक आरोप बताया गया है। चुनाव आयोग का पक्ष है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में दोहराए गए और अपात्र नामों को हटाया जा रहा है तथा जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे नियमानुसार दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।

बड़े प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई थी। रामलीला मैदान और मध्य दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में बैरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरों और निगरानी की व्यवस्था की गई। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए कई मार्गों पर डायवर्जन भी लागू किया गया। INDIA गठबंधन की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अलग मार्च आयोजित किया। भाजपा नेताओं ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को याद करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। इस तरह राजधानी में रविवार को दोनों राजनीतिक खेमों की ओर से अलग-अलग कार्यक्रमों के चलते राजनीतिक माहौल गर्म रहा। कुल मिलाकर दिल्ली का रामलीला मैदान रविवार को विपक्षी एकजुटता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों का प्रमुख केंद्र बना रहा।
