बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्नब के प्रभाव से पूर्वांचल में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश और बूंदाबांदी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की कटाई और मड़ाई के महत्वपूर्ण समय पर मौसम की बेरुखी ने किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया है। खेतों में तैयार खड़ी और काटकर रखी गई धान की फसल पर बारिश की मार पड़ रही है।

क्षेत्र के अधिकांश गांवों में इन दिनों धान की कटाई और मड़ाई का काम तेजी से चल रहा है। ऐसे में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में काटकर रखी गई धान की फसल बारिश में भीगने से उसके सड़ने, दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने और उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने की आशंका है। वहीं, जिन किसानों की फसल अभी खेतों में खड़ी है, उन्हें तेज हवा और बारिश के चलते फसल गिरने का डर सता रहा है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार करने में खाद, बीज, सिंचाई, कीटनाशक और मजदूरी पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है। फसल पकने के बाद कटाई के समय मौसम की मार ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरना शुरू कर दिया है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। ऐसे में किसानों के सामने अपनी उपज को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

लगातार बूंदाबांदी और ठंडी हवाओं के चलते तापमान में गिरावट महसूस की जा रही है। मौसम के अचानक बदले मिजाज का असर आम जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। लोगों की दिनचर्या प्रभावित होने के साथ ही पशु-पक्षियों पर भी मौसम का असर पड़ रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 से 31 अक्टूबर तक गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि कटी हुई फसल को सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखें तथा मौसम की स्थिति अनुकूल होने पर ही कटाई और मड़ाई का कार्य करें। फिलहाल किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही मौसम साफ होगा और बारिश से राहत मिलेगी, ताकि दिन-रात मेहनत कर तैयार की गई धान की फसल सुरक्षित घर तक पहुंच सके।
