श्रीराम कथा परिसर में पशु चिकित्सक ने पेश की मानवता की मिसाल

छह माह पहले करंट से झुलसे बंदर का किया स्वास्थ्य परीक्षण, पवन मिश्रा की सेवा और संवेदना की हो रही सराहना

Akhlaque Khan
Akhlaque Khan Published on : October 29, 2026 9:04 am
श्रीराम कथा परिसर में पशु चिकित्सक ने पेश की मानवता की मिसाल
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सेवा, संवेदना और करुणा का संदेश केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में उतारकर भी मानवता की मिसाल पेश की जा सकती है। इसकी एक प्रेरणादायक तस्वीर बीआरपी इंटर कॉलेज में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान देखने को मिली। यहां एक पशु चिकित्सक ने घायल बंदर का स्वास्थ्य परीक्षण कर जीव सेवा का संदेश दिया। वहीं, पिछले छह माह से बंदर की देखभाल कर रहे पवन मिश्रा के प्रयासों की भी स्थानीय लोगों ने सराहना की।

जानकारी के अनुसार, करीब छह माह पहले एक बंदर विद्युत करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया था। हादसे में उसके दोनों पिछले पैर बुरी तरह प्रभावित हो गए थे। इस मुश्किल समय में पवन मिश्रा ने संवेदनशीलता दिखाते हुए बंदर की देखभाल की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली। उन्होंने घरेलू स्तर पर उसका उपचार और देखभाल की, जिससे उसकी जान बच सकी। हालांकि, बंदर के पैर पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाए थे।इसी दौरान बीआरपी इंटर कॉलेज में चल रही श्रीराम कथा में पवन मिश्रा को जानकारी मिली कि शाहगंज के प्रसिद्ध पशु चिकित्सक डॉ. आलोक सिंह पालीवाल भी कथा में मौजूद हैं। इसके बाद वह घायल बंदर को लेकर कथा परिसर पहुंच गए और चिकित्सक से उसके स्वास्थ्य की जांच करने का अनुरोध किया।

डॉ. पालीवाल ने तत्परता दिखाते हुए बंदर के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। उन्होंने उसके झुलसे हुए पैरों की स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक दवाओं के साथ आगे की देखभाल के लिए उचित सलाह दी। इस पहल से बंदर को आगे के उपचार के लिए जरूरी चिकित्सकीय मार्गदर्शन मिल सका। श्रीराम कथा में जहां मंच से करुणा, सेवा, दया और मानवता का संदेश दिया जा रहा था, वहीं परिसर में एक बेजुबान जीव की मदद कर इन मूल्यों को व्यवहार में उतारने का उदाहरण भी सामने आया।

पवन मिश्रा द्वारा घायल बंदर की लगातार देखभाल और डॉ. आलोक सिंह पालीवाल द्वारा उसका स्वास्थ्य परीक्षण किए जाने की पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की। इस घटना ने जीवों के प्रति संवेदनशीलता और जरूरतमंद प्राणियों की सहायता करने का संदेश । इस अवसर पर डॉ. आलोक सिंह पालीवाल ने कहा कि एक चिकित्सक का दायित्व केवल अस्पताल तक सीमित नहीं होता। आवश्यकता पड़ने पर आगे बढ़कर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने सेवा और संवेदना को मानवीय मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। श्रीराम कथा परिसर में सामने आई यह घटना इस बात का उदाहरण बनी कि करुणा केवल उपदेशों में नहीं, बल्कि जरूरतमंद जीवों की सहायता करने जैसे छोटे-छोटे प्रयासों में भी दिखाई देती है।

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