भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से संस्कार भारती की ओर से दीपावली के अवसर पर मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुम्हार बंधुओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। संस्था के अध्यक्ष रचित चौरसिया के नेतृत्व में आयोजित दो दिवसीय सम्मान अभियान के दौरान पावर हाउस के पास नटौली तथा रामलीला मैदान स्थित पार्क के पीछे कुल 12 कुम्हार बंधुओं को तिलक लगाकर अंगवस्त्र एवं मिष्ठान भेंट किया गया। वहीं अक्खन सराय, सबरहद सहित अन्य स्थानों पर भी कुम्हार बंधुओं को अंगवस्त्र एवं मिष्ठान भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान संस्था के सदस्यों ने कुम्हारों का आशीर्वाद लेकर उनके पारंपरिक हुनर, मेहनत और सांस्कृतिक योगदान के प्रति आभार जताया।

संस्था के अध्यक्ष रचित चौरसिया ने कहा कि सीमित आय और तमाम आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कुम्हार बंधु पीढ़ियों से चली आ रही अपनी पारंपरिक कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति की धरोहर को जीवंत बनाए हुए हैं। आधुनिक झालरों और विद्युत सजावट के बढ़ते प्रचलन के बीच भी मिट्टी के दीपकों की लौ हमारी आस्था, परंपरा और सनातन संस्कृति का प्रतीक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मिट्टी के दीपक महज प्रकाश का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। इनके निर्माण में कुम्हार बंधुओं का अथक परिश्रम, समर्पण और पीढ़ियों का अनुभव समाहित है। ऐसे में समाज का दायित्व है कि वह इन पारंपरिक कलाकारों को सम्मान देने के साथ उनके उत्पादों को भी प्रोत्साहित करे।

संस्कार भारती का यह आयोजन संस्कृति की ज्योति जलाए रखने वाले कर्मयोगियों के प्रति सम्मान प्रकट करने और समाज में उनके योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की एक सराहनीय पहल है। इस अवसर पर संस्था के महामंत्री वीरेंद्र यादव वीरू, कोषाध्यक्ष प्रवीण बरनवाल, उपाध्यक्ष शिम प्रकाश ‘सिम्पू’, मंत्री आनंद मोदनवाल, बड़े लाल यादव, दिनेश मोदनवाल, रामजी यादव, कान्हा मोदनवाल, दिलीप अग्रहरि, प्रमेन्द्र यादव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
