उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए 1 नवंबर से ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत अस्पतालों को दवाओं की खरीद, भंडारण, स्टॉक और मरीजों को वितरित की गई दवाओं का पूरा विवरण प्रतिदिन DVDMS पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों को दवाओं की उपलब्धता, खपत और शेष स्टॉक की नियमित जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होगी। टेंडर के माध्यम से खरीदी गई दवाओं का विवरण भी पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा रैपिड टेस्ट किट, कंज्यूमेबल्स और अन्य मेडिकल सामग्री की खरीद एवं वितरण का रिकॉर्ड भी ऑनलाइन रखना होगा।

ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था लागू होने से अस्पतालों में दवाओं की कमी, जरूरत से अधिक स्टॉक जमा होने, दवाओं की एक्सपायरी और अनावश्यक खरीद जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाने में मदद मिलने की उम्मीद है। पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में दवाओं की वास्तविक जरूरत और उपलब्धता का आकलन कर सकेगा। इससे आवश्यकता के अनुसार दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

पूरी व्यवस्था की निगरानी मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन, स्वास्थ्य विभाग और शासन स्तर से की जाएगी। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों को दवाओं और सर्जिकल सामग्री की आपूर्ति नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी की ओर से जारी आदेश के बाद सरकारी अस्पतालों को नई व्यवस्था के अनुरूप अपनी रिकॉर्ड व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी। इस पहल का उद्देश्य दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था को जवाबदेह बनाना और मरीजों को समय पर आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराना है।
