राजस्थान में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रुप में पंजीकरण कराने के मामले में पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंकज यादव और नानजीराम चौधरी के रुप में हुई है। जांच में सामने आया कि नानजीराम कथित तौर पर केवल आठवीं पास है, इसके बावजूद वह डॉक्टर के रुप में पंजीकरण कराकर अस्पताल चला रहा था।

एसओजी की जांच के अनुसार, नानजीराम चौधरी ने करीब वर्ष 2010 में एक निजी क्लीनिक में मरीजों की पर्चियां बनाने का काम शुरु किया था। बाद में वह जालोर जिले के रानीवाड़ा स्थित राजदेव अस्पताल में भी ओपीडी काउंटर पर काम करने लगा। आरोप है कि वर्ष 2015 में उसने इसी अस्पताल को खरीद लिया और वर्ष 2016 में उसका नाम बदलकर भास्कर अस्पताल कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि वह कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर बना और मरीजों का इलाज करने के साथ ऑपरेशन भी करने लगा।

वहीं, दूसरे आरोपी पंकज यादव पर भी फर्जी एमबीबीएस डिग्री और अंकतालिकाओं के जरिए चिकित्सक के रुप में पंजीकरण कराने का आरोप है। जांच के मुताबिक, उसने कजाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई की थी, लेकिन भारत में डॉक्टर के रुप में प्रैक्टिस करने के लिए आवश्यक परीक्षा में सफल नहीं हो सका। इसके बाद कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान मेडिकल काउंसिल की शिकायत पर अक्टूबर 2024 में जयपुर के अशोक नगर थाने में मामला दर्ज किया गया था। शुरुआती शिकायत में आठ लोगों के नाम सामने आए थे। जांच के दौरान नानजीराम चौधरी की कथित भूमिका भी सामने आई।

एसओजी अब फर्जी दस्तावेजों के जरिए पंजीकरण कराने और इस मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। मामला चिकित्सा क्षेत्र में शैक्षणिक योग्यता और पंजीकरण के सत्यापन की गंभीरता को उजागर करता है। फर्जी योग्यता के आधार पर इलाज किए जाने से मरीजों की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है।
