लाइन बाजार थाना क्षेत्र के परियावा गांव की लौकरी मौर्या बस्ती में जमीन विवाद से क्षुब्ध एक किसान द्वारा खुद को आग लगाने का मामला सामने आया है। शनिवार सुबह हुई इस घटना में किसान दिनेश कुमार मौर्या (35) गंभीर रुप से झुलस गए। उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना से पहले बनाए गए वीडियो में किसान ने जमीन विवाद को लेकर पड़ोसियों और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

जानकारी के अनुसार, दिनेश कुमार मौर्या की गंभीर रुप से बीमार बहन बीएचयू में भर्ती हैं। किसान भी उनके उपचार के सिलसिले में वहीं रुके हुए थे। इसी दौरान उनकी निजी जमीन पर रास्ता बनाने को लेकर पड़ोसियों के साथ विवाद हो गया। किसान का आरोप है कि करीब एक सप्ताह पहले ग्राम प्रधान, ग्रामीणों और पुलिस की मौजूदगी में पंचायत हुई थी। इसमें जमीन के बदले जमीन देने अथवा मुआवजा देने पर सहमति बनी थी। दिनेश ने गांव के लिए रास्ता बनाने के उद्देश्य से अपनी आधी जमीन देने का प्रस्ताव भी रखा था।

दिनेश के मुताबिक, शुक्रवार को उनके बीएचयू में रहने के दौरान ग्राम प्रधान ने अंतिम निर्णय होने से पहले ही सड़क निर्माण शुरू करा दिया। उनकी पत्नी और बेटे लकी ने इसका विरोध किया तो मौके पर पुलिस पहुंची। किसान ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनकी पत्नी और बेटे के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा वीडियो बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा मोबाइल फोन छीन लिया।किसान ने घटना से पहले बनाए गए वीडियो में जमीन विवाद और अपने परिवार के साथ कथित व्यवहार को लेकर पीड़ा व्यक्त की।

बताया जा रहा है कि शनिवार भोर में बीएचयू से गांव लौटने पर दिनेश को सड़क निर्माण की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने वीडियो बनाया और खुद को आग लगा ली। आसपास मौजूद लोगों ने आग बुझाई और उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। किसान के हाथ, पैर और गर्दन के आसपास गंभीर रूप से झुलसने की जानकारी सामने आई है। लाइन बाजार थानाध्यक्ष विपिन राय ने बताया कि रास्ते के विवाद की सूचना पर पुलिस शुक्रवार को मौके पर गई थी और निर्माण कार्य रुकवा दिया गया था। किसान ने आत्मदाह का प्रयास क्यों किया, इसकी जानकारी अभी नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि किसान का जिला अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। थानाध्यक्ष के अनुसार, अभी तक मामले में कोई तहरीर या प्रार्थना पत्र नहीं मिला है और पुलिस प्रकरण में कार्रवाई कर रही है।

घटना के बाद जमीन विवाद के निस्तारण, पंचायत में बनी कथित सहमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। किसान की ओर से लगाए गए आरोपों और पुलिस के बयान के बीच पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन पर रास्ता बनाने को लेकर क्या सहमति बनी थी और विवाद के दौरान संबंधित पक्षों की क्या भूमिका रही।
