शिक्षा के प्रति जागरुकता और सामूहिक सहयोग की मिसाल पेश करते हुए जलालपुर गांव के ग्रामीणों ने ऐसा कदम उठाया है, जिसकी चर्चा गांव से लेकर तहसील तक हो रही है। गांव के किसानों ने अपने लाखों रुपये मूल्य की भूमि दान देकर बच्चों के लिए विद्यालय स्थापित करने का संकल्प पूरा किया है।

क्षेत्र के जलालपुर गांव में लंबे समय से परिषदीय विद्यालय के लिए स्थायी जमीन की समस्या बनी थी। पूर्व में विद्यालय का भवन किसानों की आराजी में किसी तरह संचालित हो रहा था। भवन जर्जर होने और विद्यालय के नाम निजी भूमि नहीं होने के कारण उसका जीर्णोद्धार भी नहीं हो पा रहा था। इसके चलते करीब एक वर्ष से विद्यालय का संचालन पंचायत भवन में किया जा रहा था।विद्यालय के लिए जमीन की उपलब्धता को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग के बीएसए भूपेंद्र सिंह ने गांव के किसानों से संपर्क किया। ग्रामीणों ने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए भूमि दान करने की इच्छा जताई। इसके बाद बीईओ अखिलेश यादव और ग्राम प्रधान जयप्रकाश शर्मा के प्रयास से किसानों ने अपनी भूमि की रजिस्ट्री कराने पर सहमति दी। रजिस्ट्री के खर्च को लेकर समस्या सामने आई तो विद्यालय के शिक्षकों ने इसका खर्च वहन करने का आश्वासन दिया। इसके बाद बुधवार को तहसील पिंडरा में आराजी संख्या 372 और 380 में स्थित भूमि की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की गई।

बताया गया कि 27 किसानों ने करीब 10 बिस्वा भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 35 लाख रुपये बताई जा रही है, विद्यालय के लिए दान कर दी। यह भूमि विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक सुयश जायसवाल के नाम रजिस्टर्ड की गई है।एडवोकेट सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार को 27 किसानों ने 10 बिस्वा जमीन विद्यालय के लिए दान की है। करीब पांच बिस्वा भूमि की रजिस्ट्री कुछ किसानों के बाहर होने के कारण नहीं हो सकी। उनके लौटने के बाद शेष भूमि भी विद्यालय के लिए दान किए जाने की उम्मीद है। किसानों की इस पहल की तहसील में मौजूद अधिवक्ताओं, अधिकारियों ने भी सराहना की। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय गांव में ही बेहतर ढंग से संचालित हो और बच्चों को शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े, इसी उद्देश्य से उन्होंने अपनी भूमि दान करने का निर्णय लिया। इस दौरान ग्राम प्रधान जयप्रकाश शर्मा, रत्नेश सिंह, पिंटू सिंह, नोडल शिक्षक जियाराम सरोज, मनीष गिरी, मुनिकेश सिंह सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
