वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सम्मेलन कक्ष में साइबर अपराध एवं डिजिटल सुरक्षा विषय पर महत्वपूर्ण बैठक व सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कुलपति के नेतृत्व में आयोजित विशेषज्ञ सत्र में विधि विभाग के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को साइबर अपराध, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, डेटा गोपनीयता और नए कानूनी प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं प्रख्यात साइबर विशेषज्ञ डॉ. अनुप गिरधर ने नए आपराधिक कानूनों में हुए महत्वपूर्ण बदलावों पर प्रकाश डालते हुए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की उपयोगिता और उसके संरक्षण की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4)(ग) के तहत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के प्रमाणीकरण के लिए आवश्यक प्रमाण-पत्र तथा हैश वैल्यू के माध्यम से डिजिटल साक्ष्य की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को सरल उदाहरणों के जरिए समझाया। डॉ. गिरधर ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल माध्यमों से प्राप्त साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बेहद जरुरी है। साक्ष्य के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो और उसकी मूल विश्वसनीयता बनी रहे, इसके लिए निर्धारित तकनीकी एवं कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

उन्होंने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि डिजिटल युग में निजी जानकारी की सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है। मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी, पहचान-पत्र, पासवर्ड, फोटो और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं साझा करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।साइबर विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को मजबूत पासवर्ड रखने, दो-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था अपनाने तथा संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने फर्जी बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाले लोगों, ओटीपी मांगने वालों, नकली क्यूआर कोड और सोशल मीडिया के माध्यम से भेजे जाने वाले संदिग्ध लिंक से विशेष रुप से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक अथवा कोई सरकारी संस्था फोन पर ओटीपी, पिन या पासवर्ड नहीं मांगती। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने से पहले संबंधित संस्था से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना चाहिए।

वित्तीय साइबर धोखाधड़ी पर चर्चा करते हुए डॉ. अनुप गिरधर ने कहा कि ठगी का शिकार होने के बाद घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करना सबसे जरुरी है। उन्होंने साइबर ठगी के बाद शुरुआती समय को ‘गोल्डन ऑवर’ बताते हुए कहा कि पीड़ित को तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय रहते शिकायत मिलने पर संबंधित एजेंसियां लेन-देन को रोकने अथवा राशि को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरु कर सकती हैं। इससे ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और पीड़ित को आर्थिक नुकसान से बचाने की संभावना बढ़ जाती है। कार्यक्रम के अंत में डीटी लॉ इंस्टीट्यूट के प्रमुख एवं निदेशक प्रो. विनोद कुमार ने अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. गिरधर मिश्रा, विधि विभाग के समस्त सहायक प्राध्यापक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
