मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर विवाद शुक्रवार को और तेज हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने ज्ञानेश कुमार को दिया 48 घंटे का इस्तीफा अल्टीमेटम शनिवार को समाप्त होने की बात कही है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि यदि CEC अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरु किया जाएगा, जिसे बाद में अन्य शहरों तक ले जाने की बात कही गई है।

यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के SIR को लेकर सामने आया है। हाल में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों में चुनाव आयोग के कुछ निर्णयों, विशेषकर मतदाता सूची और उससे जुड़े फॉर्म एवं प्रक्रियाओं में बदलाव को लेकर कई बार आपत्तियां या चिंताएं दर्ज कराईं। रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं ने आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है और अंतिम निर्णय आयोग द्वारा सामूहिक रुप से लिए जाते हैं। आयोग ने अपने कार्यों को कानून के अनुरूप बताया है।

CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा SIR को लेकर भी कई मांगें रखी हैं। पार्टी की मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा। SIR की प्रक्रिया को रोकना और इसकी स्वतंत्र जांच कराना।जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करना।चुनाव आयोग की मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और केंद्रीयकृत व्यवस्था की स्वतंत्र जांच। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को निरस्त करने की मांग।शामिल हैं। CJP ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अपने अभियान को “EC ठीक करो” नाम दिया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि यदि 26 सितंबर तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से मुंबई में आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद इसे देश के अन्य शहरों तक ले जाने की बात कही गई है। संगठन ने इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन को “जंतर-मंतर 2.0” नाम देने की भी घोषणा की थी।

SIR को लेकर विपक्षी दल भी चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस ने विभिन्न राज्यों में चुनाव कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया और CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची में कथित बदलावों और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।वहीं, इन आरोपों पर चुनाव आयोग का रुख अलग है। आयोग ने कहा है कि उसके निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत और आयोग के सामूहिक विचार-विमर्श के बाद लिए गए हैं। इसलिए विवाद के बीच CJP और विपक्ष के आरोपों को आरोप के रुप में तथा आयोग के जवाब को उसके आधिकारिक पक्ष के रुप में देखना महत्वपूर्ण है। विवाद के बीच भाजपा की ओर से चुनाव आयोग का बचाव किया गया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग समेत संवैधानिक संस्थाएं लोकतांत्रिक ढंग से काम कर रही हैं। दूसरी ओर विपक्षी दल आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। यदि CJP की घोषणा के मुताबिक 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू होता है, तो SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहा विवाद और व्यापक राजनीतिक बहस का रुप ले सकता है।
