यूनियन बैंक के शाखा प्रबंधक दुर्गेश श्रीवास्तव की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर परिवार और परिचितों के अनुसार मिलनसार एवं जिम्मेदार माने जाने वाले बैंक मैनेजर ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया? घटना से पहले पत्नी से हुई फोन पर बातचीत ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पत्नी के अनुसार, देर होने पर जब उन्होंने दुर्गेश को फोन किया तो उन्होंने कहा था कि “मैं डिप्रेशन में हूं। अगर तुम्हें बताऊंगा तो तुम भी परेशान हो जाओगी।” इसके कुछ समय बाद उनकी मौत की सूचना सामने आई।

दुर्गेश श्रीवास्तव मूल रूप से लखनऊ के गुडंबा क्षेत्र के रहने वाले थे और वर्तमान में जौनपुर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र में पत्नी रचना श्रीवास्तव के साथ रह रहे थे। वह सुजानगंज क्षेत्र के सराय पड़री स्थित यूनियन बैंक शाखा में प्रबंधक के पद पर तैनात थे। परिवार के अनुसार, घर में किसी तरह का विवाद नहीं था। पत्नी रचना ने बताया कि दुर्गेश पिछले कुछ समय से डिप्रेशन में जरूर थे, लेकिन उन्होंने अपनी परेशानी परिवार के साथ खुलकर साझा नहीं की थी। परिवार के मुताबिक, वह शुगर और लिवर सिरोसिस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे थे। इसके बावजूद वह परिवार और बैंक के काम को सामान्य रूप से संभाल रहे थे। परिजनों के अनुसार गुरुवार सुबह करीब नौ बजे दुर्गेश अपनी कार से बैंक के लिए निकले थे। दोपहर के समय पत्नी से फोन पर उनकी बातचीत हुई, जिसमें किसी बड़ी परेशानी का संकेत नहीं मिला। आमतौर पर वह शाम तक घर लौट आते थे। उस दिन देर होने पर पत्नी ने फोन किया तो बातचीत के दौरान उन्होंने अपने डिप्रेशन में होने की बात कही। पत्नी का कहना है कि उन्हें बातचीत से ऐसा नहीं लगा था कि दुर्गेश कोई बड़ा कदम उठाने वाले हैं। इसके बाद रास्ते में उनकी मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, कार से एक सुसाइड नोट मिला है। उसमें दुर्गेश द्वारा जीवन से परेशान होने की बात लिखे जाने की जानकारी सामने आई है। नोट में कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि उनकी मौत के लिए परिवार का कोई सदस्य जिम्मेदार नहीं है। पत्नी के लिए भी उन्होंने अपना ख्याल रखने की बात लिखी थी। यही बिंदु अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। परिजन यह मानने को तैयार नहीं हैं कि परिवार से किसी विवाद के कारण उन्होंने यह कदम उठाया।दुर्गेश के डिप्रेशन में होने की बात सामने आने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर उनके मानसिक तनाव की वजह क्या थी। परिवार की ओर से विभागीय दबाव की आशंका जताई गई है। पत्नी का कहना है कि बातचीत के दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि दुर्गेश किसी कार्य संबंधी तनाव में थे। हालांकि, अभी तक विभागीय दबाव या किसी अधिकारी द्वारा कथित उत्पीड़न की पुष्टि पुलिस जांच में नहीं हुई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि बैंक से जुड़े किसी दबाव के कारण ही यह घटना हुई। पुलिस की जांच, फॉरेंसिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बैंक से संबंधित परिस्थितियों की पड़ताल के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

परिजनों और परिचितों के अनुसार दुर्गेश श्रीवास्तव का व्यवहार मिलनसार था। बैंक से जुड़े लोगों और ग्राहकों के बीच भी वह सामान्य एवं मृदुभाषी व्यवहार के लिए जाने जाते थे। यही कारण है कि उनकी अचानक हुई मौत से परिचित लोग भी स्तब्ध हैं। बीमारी और तनाव के बावजूद वह नियमित रुप से बैंक का कार्य कर रहे थे। उनके करीबियों के मुताबिक उन्होंने अपनी परेशानी को सार्वजनिक रुप से कभी जाहिर नहीं किया। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आतिश सिंह के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई की गई। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल और वाहन की जांच कर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जांच में और तथ्य सामने आने की उम्मीद है। वहीं, यूनियन बैंक के रीजनल हेड संतोष कुमार से मामले को लेकर जानकारी लेने पर उन्होंने कहा कि बैंक स्तर पर भी प्रकरण को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने फिलहाल व्यस्त होने की बात कहते हुए बाद में इस विषय पर विस्तार से बातचीत करने की बात कही। दुर्गेश श्रीवास्तव की मौत के बाद फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर वह किस मानसिक दबाव से गुजर रहे थे।
