समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार को लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से समाजवादी पार्टी सहित प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।

रामगोविंद चौधरी लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। वे आठ बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए और वर्ष 2017 से 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनके आठ विधायक कार्यकाल दर्ज हैं। रामगोविंद चौधरी का जन्म 7 सितंबर 1953 को बलिया जिले के गोसाईपुर गांव में हुआ था। उन्होंने स्नातक और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की तथा अधिवक्ता के रुप में भी कार्य किया। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरु हुआ। वे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े और आपातकाल के दौरान जेल भी गए।वर्ष 1977 में उन्होंने चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक का चुनाव जीता। इसके बाद 1980, 1985, 1989 और 1991 सहित विभिन्न चुनावों में विधानसभा पहुंचे। बाद के वर्षों में बांसडीह विधानसभा क्षेत्र उनकी प्रमुख राजनीतिक कर्मभूमि बना। उन्होंने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकारों में मंत्री के रुप में भी जिम्मेदारी संभाली। विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार वे मुलायम सिंह यादव मंत्रिमंडल तथा अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में भी रहे।

रामगोविंद चौधरी के निधन पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष का निधन अत्यंत दुखद है तथा ईश्वर शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करें। सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी रामगोविंद चौधरी के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने उन्हें समाजवादी पार्टी का वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों और समर्थकों को इस दुख को सहने की शक्ति मिलने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामगोविंद चौधरी के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा का पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मंत्री बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी रामगोविंद चौधरी के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति और उनके परिजनों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति मिलने की कामना की। प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी पूर्व मंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी के निधन को दुखद बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोकाकुल परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
कांग्रेस नेता ललन कुमार ने दिवंगत चौधरी के निधन पर दुख जताया और उनके निधन को प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया। सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने रामगोविंद चौधरी के निधन को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनका योगदान और संघर्ष लंबे समय तक याद किया जाएगा। उन्होंने परिजनों और समर्थकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। श्री चौधरी का राजनीतिक जीवन करीब पांच दशक तक फैला रहा। वे समाजवादी विचारधारा से जुड़े उन नेताओं में रहे जिन्होंने विधानसभा के भीतर लंबे समय तक विपक्ष और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाया। 2017 में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने और 2022 तक इस पद पर रहे। उनके निधन से बलिया की राजनीति के साथ समाजवादी पार्टी ने अपने एक अनुभवी नेता को खो दिया है। उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संसदीय अनुभव और समाजवादी आंदोलन से जुड़े योगदान को पार्टी कार्यकर्ताओं और विभिन्न दलों के नेताओं ने स्मरण किया है।
