महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसकी छाती दबाने के आरोपों को दुष्कर्म के प्रयास का पर्याप्त आधार नहीं मानने वाले पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताया है।

मामला वर्ष 2008 में बिहार के बांका जिले का है। अभियोजन के अनुसार एक महिला अपने पिता के साथ अमरपुर स्थित एक फोटो स्टूडियो में फोटो खिंचवाने गई थी। आरोप है कि स्टूडियो संचालक ने उसके पिता को बाहर भेजकर महिला को कमरे में रोक लिया और दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद उसने कथित तौर पर महिला की सलवार उतारने की कोशिश की और उसकी छाती दबाकर दुष्कर्म का प्रयास किया। महिला के शोर मचाने पर उसके पिता मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया।मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास सहित संबंधित धाराओं में दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने पटना हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।
9 जुलाई 2026 को पटना हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए दुष्कर्म के प्रयास से संबंधित दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों से दुष्कर्म करने के स्पष्ट इरादे अथवा उसके लिए आवश्यक प्रत्यक्ष कृत्य का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलता।हालांकि, हाईकोर्ट ने महिला को कमरे में बंद करने, उसकी सलवार उतारने की कोशिश और छेड़छाड़ को महिला की लज्जा भंग करने से संबंधित अपराध के दायरे में माना था।

बुधवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष मामला आया। सुनवाई के दौरान पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। सीजेआई सूर्यकांत ने बिहार के एडवोकेट जनरल से आरोपी को नोटिस की तामील कराने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को सुने बिना हाईकोर्ट के फैसले को सीधे रद्द नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान लेने के बावजूद फिलहाल पटना हाईकोर्ट का फैसला रद्द नहीं हुआ है। मामले में संबंधित पक्षों को सुनने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट आगे कोई निर्णय लेगा। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने एक अन्य यौन अपराध मामले की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट के इस फैसले की ओर सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक पुराने मामले में इसी तरह की घटना की कानूनी व्याख्या को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। अब पटना हाईकोर्ट की टिप्पणियों और दुष्कर्म के प्रयास की कानूनी कसौटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर नजर रहेगी।
