यूजीसी के प्रस्तावित इक्विटी रेगुलेशन 2026 को पूरी तरह वापस लेने तथा आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया। ज्ञापन में उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बढ़ती विषमता तथा युवाओं में व्याप्त असंतोष का हवाला देते हुए सरकार से इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए नए इक्विटी रेगुलेशंस 2026 के कुछ प्रावधान समाज में विभाजन पैदा करने वाले हैं। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर अंतरिम रोक लगाई है और केंद्र सरकार इस पर पुनर्विचार कर रही है। ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार से भी केंद्र सरकार को पत्र भेजकर इन प्रावधानों को पूरी तरह वापस लेने (रोलबैक) की अनुशंसा करने की मांग की गई।ज्ञापन में वर्तमान जातिगत आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा गया कि भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आरक्षण का आधार केवल जाति न होकर आर्थिक स्थिति पर भी आधारित होना चाहिए। साथ ही संपन्न वर्ग को आरक्षण से बाहर कर वास्तविक रुप से पिछड़े और कमजोर वर्ग के लोगों को इसका लाभ दिलाने की बात कही गई है।
इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग ईडब्ल्यूएस को मिलने वाले 10 प्रतिशत आरक्षण की जटिल शर्तों एवं नियमों को सरल बनाने की मांग की गई है, ताकि पात्र लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके। ज्ञापन में कहा गया कि उच्च शिक्षा में हिस्सेदारी पर खड़े सवाल केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक गारंटी से जुड़े विषय हैं। सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए यूजीसी रेगुलेशन तथा आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था में उचित व त्वरित हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया है।
ज्ञापन देने वालों में विवेक सिंह, मनीष सिंह, संदीप सिंह, जीवित कुमार सिंह, सुशील, करणी सेना जिला संयोजक दीपू सिंह, राना सिंह, करणी सेना अध्यक्ष शुभम सिंह, सुमित मिश्रा, लकी उपाध्याय, एसके सिंह, निलेश मिश्रा, हर्ष सिंह, सुशील सिंह, अमित उपाध्याय, गौरव सिंह, आलोक त्रिपाठी आदि रहे।
