निवेश में भारी मुनाफे का लालच, डिजिटल अरेस्ट समेत साइबर ठगी के अलग-अलग तरीकों से देशभर में करीब दो हजार लोगों से तीन साल में 5,600 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत दो आरोपितों को गिरफ्तार किया। ठगी की रकम को ऑनलाइन गेम, आईपीएल और अन्य मैचों में सट्टा खेलने वालों के बैंक खातों, मर्चेंट खातों और फर्जी फर्मों के जरिए घुमाकर ठिकाने लगाया जाता था।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने स्लॉटर और स्क्रैप ट्रेडिंग के नाम पर 77 फर्जी फर्में तैयार कर रखी थीं। इन फर्मों के खातों के माध्यम से ठगी की रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित किया जाता था। इसके अलावा रकम को हवाला के जरिए भी इधर-उधर भेजने की बात सामने आई है।कानपुर निवासी बीकॉम पास शाहजेव वारिस के बैंक खातों में ठगी की रकम पहुंचने से संबंधित नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 86 शिकायतें मिलीं। पुलिस ने करीब पांच हजार पेज के बैंक खातों के विवरण और कानपुर, उन्नाव समेत आसपास के जिलों में 45 लोगों के नाम पर संचालित फर्जी फर्मों के खातों की जांच की। इसी दौरान शाहजेव का गिरोह से सीधा लिंक सामने आया।
पुलिस के मुताबिक 18 अगस्त को शाहजेव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उसी दिन वह दुबई भाग गया। 21 अगस्त को लौटने के बाद 25 अगस्त को वह अपने पांच साथियों एहतेशाम हुसैन, शाहवेज इलाही, मो. मुजम्मिल, मो. अनस और अर्सलान के साथ दोबारा दुबई चला गया। पुलिस को शाहजेव के भारत लौटकर हैदराबाद में होने की जानकारी मिली। साइबर टीम तत्काल वहां पहुंची। लुकआउट नोटिस जारी होने के कारण हैदराबाद पुलिस ने उसे एयरपोर्ट पर ही पकड़ लिया। पुलिस के अनुसार गिरोह के 14 मुख्य सदस्यों के बैंक खातों और फर्जी फर्मों में हुए लेनदेन की जांच से ठगी की रकम और पीड़ितों की संख्या का बड़ा खुलासा हुआ है। शाहजेव के नाम से संचालित 11 फर्मों के खातों में वर्ष 2023 से अब तक करीब 170 करोड़ रुपये का लेनदेन मिला है। वहीं सलमान के एक खाते में करीब 16 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। गिरोह के दो आरोपित पहले से ही साइबर ठगी के मामलों में जेल में बंद हैं। वहीं एक दारोगा के बेटे समेत करीब 10 फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक गिरोह ठगी की रकम को यूएसडीटी (यूएस डॉलर टेदर), बोगस फर्मों के बैंक खातों और मर्चेंट पेमेंट खातों के जरिए करंट खातों में भेजता था। इसके बाद रकम को कई बार अलग-अलग खातों में घुमाकर निकाला जाता था, ताकि पुलिस के लिए पैसे की पूरी चेन को ट्रेस करना मुश्किल हो जाए। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्यों में लोगों को अपना निशाना बनाया। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, फर्जी फर्मों और खातों के जरिए हुए करोड़ों रुपये के लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है।
