जिले के एक प्राथमिक विद्यालय में छात्र की दर्दनाक मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन शिक्षकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक शिक्षक, प्रभारी प्रधानाध्यापक और एक शिक्षामित्र शामिल हैं। तीनों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले में कुल पांच लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, विद्यालय में पढ़ने वाला छात्र अरशद स्कूल के शिक्षक के कहने पर छत पर लगी सब्जियां तोड़ने के लिए ऊपर गया था। इसी दौरान विद्यालय की छत के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से वह गंभीर रुप से झुलस गया। करंट लगने से उसकी मौत हो गई। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और गांव में शोक का माहौल छा गया। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बच्चों को ऐसी जगह पर क्यों भेजा गया, जहां ऊपर से हाईटेंशन बिजली की लाइन गुजर रही थी? यदि छात्र को छत पर सब्जियां तोड़ने के लिए भेजे जाने की बात जांच में सही साबित होती है, तो यह विद्यालय प्रबंधन की गंभीर लापरवाही का मामला बनता है।

बताया जा रहा है कि विद्यालय की छत के ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी। इसके बावजूद इस संभावित खतरे को दूर करने के लिए समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। विद्यालय परिसर में बच्चों की सुरक्षा के इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कुल पांच लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। शेष आरोपियों की भूमिका और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। घटना ने सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों की जिम्मेदारी और खतरनाक बिजली लाइनों के आसपास बने स्कूलों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का सवाल है कि जब विद्यालय के ऊपर से इतनी खतरनाक हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी, तो बच्चों की सुरक्षा के लिए पहले से ठोस इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
