नगर पालिका परिषद कथित राजस्व चोरी, वित्तीय अनियमितताओं और शासनादेशों की अनदेखी का मामला अब मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच गया है। नगर पालिका परिषद के नामित सभासद एवं पूर्व उपाध्यक्ष श्यामजी गुप्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर IGRS पोर्टल पर दर्ज शिकायत की जांच आख्या पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने जांच को एकपक्षीय, पक्षपातपूर्ण और भ्रामक बताते हुए उसे तत्काल निरस्त करने तथा पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय संयुक्त समिति से दोबारा जांच कराने की मांग की है।

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर पालिका क्षेत्र में राजस्व वसूली, कर निर्धारण और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में कथित तौर पर व्यापक अनियमितताएं हुई हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन मामलों में शासनादेशों और उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी की गई है। पत्र के अनुसार, IGRS प्रकरण की जांच में निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के बजाय संबंधित अधिकारियों के पक्ष में एकपक्षीय जांच आख्या तैयार कर दी गई। आरोप है कि जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े अभिलेखों का समुचित परीक्षण किए बिना ही संबंधित आरोपियों के स्वयं के बयानों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर दी।

शिकायतकर्ता ने नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष, कर अधीक्षक, कर लिपिक और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि राजस्व क्षति से जुड़े मामलों में जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि कर वसूली एवं पुनर्मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों के बावजूद संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई।शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित करने की मांग की है। इसमें भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) तथा उत्तर प्रदेश के राज्य लेखा परीक्षा निदेशालय के वरिष्ठ एवं विशेषज्ञ अधिकारियों को अनिवार्य रुप से शामिल करने का अनुरोध किया गया है।

पत्रक में मुख्यमंत्री से तीन प्रमुख मांगें की गई हैं। इनमें IGRS शिकायत संख्या 40019426083909 पर प्रस्तुत कथित पक्षपातपूर्ण जांच आख्या को तत्काल प्रभाव से निरस्त करना, उच्चस्तरीय संयुक्त समिति से दोबारा जांच कराना तथा जांच में राजस्व क्षति के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई करना शामिल है। शिकायतकर्ता ने पत्र के साथ पूर्व में प्रस्तुत शिकायत और संबंधित जांच अधिकारी की आख्या की छायाप्रतियां भी संलग्न की हैं।
