नगर का ऐतिहासिक दशहरा मेला मंगलवार को विशालकाय रावण के दहन के साथ सकुशल संपन्न हो गया। मेले में स्थानीय विधायक रमेश सिंह सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। रावण दहन देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह रहा। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन और पुलिस मुस्तैद रही, जिसके चलते मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

शाहगंज के दशहरा मेले की सबसे बड़ी पहचान यहां तैयार किया जाने वाला विशालकाय रावण है, जिसे जिले का सबसे बड़ा रावण बताया जाता है। इसकी खासियत केवल इसका आकार ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी सामाजिक सौहार्द की परंपरा भी है। रावण के पुतले का निर्माण एक मुस्लिम परिवार तीन पीढ़ियों से करता आ रहा है। हालांकि, कुछ विषम परिस्थितियों के चलते बीच के दो वर्षों में यह परिवार पुतले का निर्माण नहीं कर सका था, लेकिन इस परंपरा का महत्व आज भी बरकरार है। धार्मिक आयोजन में इस परिवार की भागीदारी आपसी भाईचारे और साझा सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत मिसाल पेश करती है।

मेले की रौनक बढ़ाने में सुशील सेठ बागी की परिकल्पना से आयोजित धार्मिक कार्यक्रम ‘हर घर से निकले राम’ की विशेष भूमिका रही। कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चे भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की आकर्षक वेशभूषा में पहुंचे। बच्चों के धार्मिक स्वरूप ने लोगों का ध्यान खींचा और माहौल को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम संयोजक सुशील सेठ बागी ने बच्चों को उपहार देकर उनका उत्साहवर्धन किया। मेले में उमड़ी भारी भीड़ के बीच रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। लोगों ने मेले का आनंद लेते हुए पर्व की खुशियां साझा कीं। भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी।

विशालकाय रावण, तीन पीढ़ियों से चली आ रही निर्माण परंपरा और ‘हर घर से निकले राम’ जैसे आयोजन इस बार भी शाहगंज के ऐतिहासिक दशहरा मेले के प्रमुख आकर्षण रहे। रावण दहन के साथ नगर का यह पारंपरिक उत्सव शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया।

