जमीन का विवाद जब रिश्तों पर भारी पड़ जाए तो अपने ही अपनों के खून के प्यासे बन जाते हैं। कुछ ऐसा ही सनसनीखेज मामला मंगलवार को क्षेत्र के रानीमऊ गांव में सामने आया। यहां जमीन की पुरानी रंजिश में एक अधेड़ की कथित तौर पर लाठी-डंडों से पीटकर हत्या कर दी गई। जिस सड़क पर रोजमर्रा की जिंदगी की चहल-पहल रहती थी, उसी सड़क पर दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। घटना से जहां इलाके में सनसनी फैल गई, वहीं एक परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं।

रानीमऊ गांव निवासी नरगिस पत्नी अकरम ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया कि मंगलवार दोपहर करीब एक बजे उनके पति अकरम को जमीन की रंजिश में पट्टीदारों ने रानीमऊ सड़क पर घेर लिया। इसके बाद लाठी-डंडों से उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावरों ने अकरम को इतनी बेरहमी से पीटा कि गंभीर चोटें आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जिन रिश्तों में अपनापन और भरोसा होना चाहिए था, उन्हीं पट्टीदारों पर खून बहाने का आरोप लगा है।जमीन का विवाद इस कदर बढ़ गया कि एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी। अकरम की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी नरगिस के सिर से पति का साया हमेशा के लिए उठ गया। एक पल में हंसता-खेलता परिवार गहरे सदमे में डूब गया।

मृतक की पत्नी ने तहरीर में सात लोगों को नामजद करते हुए हत्या का आरोप लगाया है। आरोपित खुटहन थाना क्षेत्र के सेठुआपारा गांव के निवासी और मृतक के पट्टीदार बताए जा रहे हैं। नरगिस का यह भी आरोप है कि पति की पिटाई के बाद आरोपियों ने उनके घर और दुकान में ताला लगा दिया और मौके से फरार हो गए। पति की मौत के गम के बीच घर और दुकान में ताला लगाए जाने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है। रानीमऊ की यह घटना एक बार फिर उस कड़वी हकीकत की ओर इशारा कर रही है, जहां जमीन के चंद टुकड़ों को लेकर रिश्ते दुश्मनी में बदल जाते हैं। वर्षों की पारिवारिक नजदीकियां रंजिश की आग में जलकर राख हो जाती हैं। आखिर जमीन की कीमत इंसान की जिंदगी से बड़ी कब हो गई? यह सवाल घटना के बाद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

पीड़िता ने पुलिस से सातों नामजद आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। अब पुलिस की जांच से ही घटना की पूरी सच्चाई और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल इस घटना ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया है और जमीन के विवाद में हिंसा के गंभीर परिणामों को एक बार फिर सामने ला दिया है।
