ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल फोन पर तेज आवाज में बात करना, स्पीकर पर गाने बजाना या बिना ईयरफोन के वीडियो और सोशल मीडिया रील चलाना अब यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। दक्षिण रेलवे ने ट्रेनों और रेलवे परिसरों में शोर-शराबे पर अंकुश लगाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य सहयात्रियों की नींद, आराम और यात्रा के दौरान शांति बनाए रखना है।

रेलवे के 6 अक्टूबर 2026 के परिपत्र के अनुसार, संबंधित मंडलों को ट्रेनों और स्टेशनों पर यात्रियों को नियमों के प्रति जागरूक करने को कहा गया है। इसके लिए सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में घोषणाएं करने तथा जागरूकता संबंधी नोटिस लगाने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देश में रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत शोर-शराबा करने और अन्य यात्रियों को परेशान करने वाले व्यवहार पर कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, ऐसे मामलों में 1,000 रुपये तक जुर्माने की चेतावनी दी गई है। संबंधित परिस्थितियों में अधिकृत रेलवे कर्मचारी यात्री को ट्रेन या रेलवे परिसर से हटाने तथा टिकट या पास जब्त करने की कार्रवाई भी कर सकते हैं।

रेलवे के निर्देश के मुताबिक, अधिकृत कर्मचारी की चेतावनी के बावजूद उपद्रव जारी रखने पर लागू कानूनी प्रावधानों के तहत छह महीने तक के साधारण कारावास, 5,000 रुपये तक जुर्माने या दोनों की सजा का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, कार्रवाई और सजा संबंधित कानून की लागू शर्तों तथा मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगी।रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे मोबाइल फोन पर बातचीत करते समय आवाज धीमी रखें। गाने सुनने, फिल्में देखने और सोशल मीडिया रील चलाने के लिए ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल करें। इससे आसपास बैठे यात्रियों को अनावश्यक शोर का सामना नहीं करना पड़ेगा और सभी की यात्रा अधिक आरामदायक बनी रहेगी।
