समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े जौहर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन की जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खान समेत पांच आरोपियों के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों की जांच की जाएगी।

बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च और ट्रस्ट की ओर से घोषित वित्तीय विवरणों के बीच बड़े अंतर को लेकर की गई है। एफआईआर में लगाए गए आरोप की जांच की जा रही है। ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, जौहर विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न भवनों के निर्माण पर लगभग 494.46 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया है। वहीं, वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक के आयकर रिटर्न में पूंजीगत व्यय के रुप में करीब 78.32 करोड़ रुपये दर्शाए जाने की बात सामने आई है। एजेंसी के अनुसार, दोनों आंकड़ों के बीच लगभग 416.14 करोड़ रुपये का अंतर है। जांच एजेंसी इस अंतर के पीछे की वजह, निर्माण कार्यों के लिए धन के स्रोत और खर्च की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में जुटी है।

ईडी को आशंका है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल की गई धनराशि के कुछ हिस्से का संबंध सरकारी कार्यों के लिए जारी धन से हो सकता है। इसी आशंका के आधार पर संबंधित ठेकेदारों, कंपनियों और ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। ईडी की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सरकारी निर्माण कार्यों के लिए ठेके हासिल करने वाले कुछ ठेकेदारों के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण सामग्री पहुंचाई गई। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि सरकारी परियोजनाओं के लिए आवंटित धन और सामग्री का इस्तेमाल कहीं विश्वविद्यालय के निर्माण में तो नहीं किया गया। रिपोर्ट में एक कंपनी को वर्ष 2013-14 से 2016-17 के बीच करीब 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके मिलने का उल्लेख है। ईडी का आरोप है कि इस रकम का एक हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल किया गया हो सकता है। जांच में विश्वविद्यालय परिसर में बने कुछ निर्माण कार्यों के लिए सरकारी धन खर्च किए जाने के आरोप भी शामिल हैं। ईडी की रिपोर्ट में पंडाल, ओबीसी बालक छात्रावास और अस्पताल के निर्माण पर लगभग 23.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है।

एजेंसी के अनुसार, पंडाल के निर्माण से संबंधित शुरुआती सरकारी आदेश में उसके स्वामित्व को संस्कृति विभाग के पास रखने और सरकारी उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की शर्त थी। बाद में स्वामित्व विश्वविद्यालय को हस्तांतरित किए जाने का मामला भी जांच के दायरे में है। इसके अलावा, विधानसभा क्षेत्र विकास निधि से विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 6.60 करोड़ रुपये के कार्य कराए जाने का भी उल्लेख किया गया है। ईडी इन निर्माण कार्यों के लिए धन आवंटन, उसके उपयोग व स्वामित्व हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। नई एफआईआर से एक दिन पहले, 13 अक्टूबर को ईडी की टीम ने रामपुर जिला जेल में आजम खान से पूछताछ की थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह पूछताछ लगभग आठ घंटे तक चली। पूछताछ के दौरान जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय को मिले दान, निर्माण कार्यों पर हुए खर्च, धन के स्रोत और ट्रस्ट से जुड़ी कंपनियों एवं ठेकेदारों के साथ हुए लेनदेन के बारे में जानकारी जुटाई गई।

ईडी इससे पहले भी इस मामले में ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसी वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल की गई रकम कहां से आई और उसका वास्तविक उपयोग किस तरह हुआ। जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े मामले में ईडी की जांच पहले से जारी है। एजेंसी की धनशोधन जांच का संबंध रामपुर में दर्ज पहले के कई मुकदमों से भी है। इन मामलों में जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं। ईडी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ट्रस्ट को मिले दान की वास्तविक स्थिति क्या थी, विभिन्न संस्थाओं के बीच धन का हस्तांतरण किस प्रकार हुआ और विश्वविद्यालय के निर्माण में उस धन का कितना इस्तेमाल किया गया। आजम खान और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। ताजा एफआईआर में लगाए गए आरोपों के आधार पर संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड, सरकारी आदेशों, ठेकेदारों के लेनदेन और निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल 416.14 करोड़ रुपये के कथित अंतर और सरकारी धन के संभावित इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।
