उत्तर प्रदेश में करीब 12 वर्ष पुराने पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया। उन्हें बुधवार को राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया। भर्ती प्रक्रिया के दौरान योगेश कुमार पशुपालन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे। जांच एजेंसी के अनुसार, विवेचना के दौरान भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में उनकी भूमिका से जुड़े साक्ष्य सामने आए हैं।

जानकारी के अनुसार, योगेश कुमार की गिरफ्तारी से पहले शासन से अभियोजन की आवश्यक स्वीकृति प्राप्त की गई थी। इसके बाद EOW की टीम ने उनके आवास पर पहुंचकर कार्रवाई की। इस मामले में जांच एजेंसी लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों, चयन के नियमों और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही थी। EOW के अधिकारियों के मुताबिक, जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पूर्व प्रमुख सचिव के खिलाफ कार्रवाई की गई है। यह मामला अब एक बार फिर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। यह मामला वर्ष 2014 का है, जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। उस समय प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारी के कुल 1198 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। परीक्षा 2 फरवरी 2014 को हुई थी।

भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए थे। बाद में मामला न्यायालय पहुंचा और जांच के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान चयन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों के पालन, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और चयन समितियों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। कुल 1198 पदों के सापेक्ष 1005 अभ्यर्थियों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण और नियुक्ति दी गई थी। भर्ती में कथित गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से उठाए गए सवालों के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। जांच में कथित तौर पर भर्ती नियमों को दरकिनार कर ओएमआर शीट के मूल्यांकन की व्यवस्था में बदलाव किए जाने तथा मंडलीय चयन समितियों के अधिकारों को प्रभावित किए जाने जैसे बिंदुओं की पड़ताल की गई।आरोप था कि चयन प्रक्रिया में निर्धारित व्यवस्था का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की आशंका थी। जांच एजेंसी अब यह निर्धारित करने में जुटी है कि इन कथित अनियमितताओं में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही और निर्णय किस स्तर पर लिए गए थे।

भर्ती के समय राजकिशोर सिंह प्रदेश सरकार में पशुधन विकास मंत्री थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति से संबंधित फाइल शासन स्तर पर लंबित बताई गई है। पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती प्रकरण में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू की थी। अभ्यर्थियों की शिकायतों और न्यायालय में दायर याचिकाओं के बाद मामले ने गंभीर रुप ले लिया। अब सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। जांच एजेंसी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर सकती है। 12 साल पुराने इस मामले में पूर्व प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इस कार्रवाई ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, सरकारी चयन समितियों की जवाबदेही और उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
