भरत मिलाप व अरण्यकांड के भावुक प्रसंगों का मंचन, भरत ने श्रीराम की चरण पादुका सिर पर धारण कर लौटने का किया निर्णय, भावुक हुए श्रद्धालु

Akhlaque Khan
Akhlaque Khan Published on : October 13, 2026 5:14 am
भरत मिलाप व अरण्यकांड के भावुक प्रसंगों का मंचन, भरत ने श्रीराम की चरण पादुका सिर पर धारण कर लौटने का किया निर्णय, भावुक हुए श्रद्धालु
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नगर की ऐतिहासिक रामलीला के सातवें दिन मंगलवार को विभिन्न मंचों पर रामायण के भावुक, रोमांचक और प्रेरणादायक प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। आदर्श राशेश्वरी रामलीला मंडली के कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पक्का पोखरा स्थित मुख्य मंच पर भरत मनावन, निषादराज-भरत संवाद, भरत सभा और जनक आगमन जैसे प्रसंगों का मंचन हुआ, वहीं नई आबादी स्थित मंच पर अरण्यकांड के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत किया गया।

रामलीला के क्रम में नगर के संगत नगर स्थित संगतजी मंदिर से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का रथ ढोल-नगाड़ों के साथ पक्का पोखरा स्थित मुख्य मंच पर पहुंचा। इसके बाद दिन की लीला आरंभ हुई। रथ के आगमन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। दोनों मंचों पर लीला व्यास के मधुर भजनों और श्लोकों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। मंच पर भरत मनावन और निषादराज-भरत संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम को वनवास से वापस अयोध्या लाने के लिए भरत जी का चित्रकूट प्रस्थान, निषादराज के साथ उनका संवाद, लक्ष्मण का क्रोध, भरत-राम संवाद, भरत सभा और राजा जनक के आगमन जैसे प्रसंगों ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

जब प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास की अवधि पूरी होने से पहले अयोध्या लौटने से इनकार कर दिया, तब भरत ने उनकी चरण पादुका को सिर पर धारण कर अयोध्या लौटने का निर्णय लिया। इस मर्मस्पर्शी दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। कलाकारों के सशक्त अभिनय और संवादों ने रामायण के त्याग, प्रेम, भाईचारे और मर्यादा के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं नगर के नई आबादी स्थित मंच पर रात्रि लीला में भगवान श्रीराम के वनवास काल के अरण्यकांड से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया।

इंद्रपुत्र जयंत की कुटिल चाल और उसके दुस्साहस का प्रसंग कलाकारों ने सजीवता से प्रस्तुत किया। इसके साथ ही महर्षि अत्रि से प्रभु श्रीराम के मिलन तथा माता अनुसूया और माता सीता के बीच हुए संवाद का मंचन किया गया। इस प्रसंग में नारी धर्म, पतिव्रत और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े संदेशों को प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को प्रेरित किया। वन में राक्षसों के अत्याचार के अंत से जुड़े प्रसंग में विराध वध का रोमांचक दृश्य दिखाया गया। वहीं शरभंग मुनि से प्रभु श्रीराम के मिलन और संतों की रक्षा के संकल्प से जुड़े प्रसंग का भी प्रभावशाली मंचन किया गया।

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