श्रीरामलीला समिति के तत्वावधान में गांधीनगर कलेक्टरगंज स्थित मंच पर आयोजित ऐतिहासिक रामलीला के तीसरे दिन गुरुवार की रात भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े मर्मस्पर्शी प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। वृंदावन की आदर्श रासेश्वरी रामलीला मंडली के कलाकारों ने कोप भवन, दशरथ-कैकेयी संवाद, कैकेयी-राम संवाद, राम-कौशल्या संवाद और राम-सीता संवाद की सजीव प्रस्तुति से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। लीला व्यास योगेश महाराज के मधुर भजनों और कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं के जय श्रीराम के उद्घोष से मंचन स्थल गुंजायमान रहा।

तीसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत श्रीराम दरबार की भव्य आरती के साथ हुई। समिति के पदाधिकारियों ने विधि-विधान से आरती उतारी, जिसके बाद मुख्य लीला का मंचन प्रारंभ हुआ। कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण अभिनय शैली से रामायण के उन प्रसंगों को जीवंत कर दिया, जिनमें पारिवारिक संबंधों, वचन पालन और त्याग की भावना का मार्मिक चित्रण मिलता है। लीला की शुरुआत रानी कैकेयी के कोप भवन में जाने के दृश्य से हुई। मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगने का प्रसंग मंचित किया गया। कैकेयी ने पहले वरदान के रुप में भरत के राजतिलक और दूसरे वरदान के रुप में भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास देने की मांग रखी।

कैकेयी की इस मांग को सुनकर राजा दशरथ की विवशता और व्याकुलता का कलाकारों ने मार्मिक चित्रण किया। एक ओर महाराज दशरथ अपने प्रिय पुत्र श्रीराम से अगाध स्नेह रखते हैं, तो दूसरी ओर पूर्व में दिए गए वचन से बंधे होने के कारण असहाय नजर आते हैं। दशरथ-कैकेयी संवाद के इस दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।कैकेयी और भगवान श्रीराम के बीच संवाद का दृश्य रामलीला का प्रमुख आकर्षण रहा। जब श्रीराम को वनवास की जानकारी मिली, तो उन्होंने बिना किसी विरोध के पिता के वचन को सर्वोपरि मानते हुए वन जाने का निर्णय स्वीकार कर लिया। उनके त्याग, आज्ञाकारिता और मर्यादा के भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। इस दौरान पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद राम-कौशल्या संवाद का मंचन हुआ। पुत्र के वन जाने की बात सुनकर माता कौशल्या की व्याकुलता और श्रीराम द्वारा उन्हें समझाने के दृश्य ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। वहीं, राम-सीता संवाद में माता सीता ने पति के साथ वन जाने का संकल्प व्यक्त किया। सीता के समर्पण और दृढ़ निश्चय की प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

लीला व्यास योगेश महाराज ने अपने मधुर भजनों और कीर्तनों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर किया। मंचन के दौरान कलाकारों के अभिनय और भजनों की मधुर धुनों ने ऐसा वातावरण बनाया कि दर्शक देर तक रामलीला के प्रसंगों में भावनात्मक रुप से जुड़े रहे। समिति के अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने बताया कि रामलीला के चौथे दिन शुक्रवार को केवट प्रसंग और श्रीराम के वन गमन से जुड़ी आगे की लीला का भावपूर्ण मंचन किया जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से रामलीला में पहुंचकर धार्मिक आयोजन का लाभ लेने की अपील की। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
