गंगा की जलीय जैव विविधता को समृद्ध करने और राज्यमीन चिताला के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में मत्स्य विभाग की ओर से पहल की जा रही है। अस्सी घाट पर गुरुवार को रिवर रैंचिंग कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान गंगा में करीब एक लाख चिताला मछलियों की अंगुलिकाएं छोड़ी जाएंगी।

मत्स्य विभाग के अनुसार, रिवर रैंचिंग का उद्देश्य गंगा में मछलियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और जैव विविधता का संरक्षण करना है। कार्यक्रम में विशेष सचिव मत्स्य सुनील कुमार वर्मा के शामिल होने का प्रस्ताव है। वहीं जेडी मत्स्य अनिल कुमार अथवा डिप्टी डायरेक्टर फिशरीज (प्लानिंग) के भी उपस्थित रहने की संभावना है। मत्स्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि अस्सी घाट पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान करीब एक लाख चिताला मछलियों की अंगुलिकाएं गंगा में छोड़ी जाएंगी। उन्होंने कहा कि रिवर रैंचिंग के जरिए चिताला मछली की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि चिताला गंगा के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी संख्या में वृद्धि से जलीय खाद्य शृंखला को मजबूती मिलने के साथ नदी की जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा मछली लोगों के लिए प्रोटीनयुक्त पौष्टिक आहार का भी महत्वपूर्ण स्रोत है।मत्स्य विभाग के उपनिदेशक ने बताया कि नदियों में विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के संरक्षण और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए रिवर रैंचिंग की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके तहत मछलियों के बीज अथवा अंगुलिकाओं को नदी में छोड़ा जाता है।उन्होंने कहा कि नदी के पारिस्थितिकी तंत्र में मछलियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विभिन्न जलीय जीवों के बीच प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में भी इनका योगदान रहता है। रिवर रैंचिंग के माध्यम से मछलियों की संख्या बढ़ाने के साथ गंगा के जलीय संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। मत्स्य विभाग का मानना है कि इस तरह की पहल से गंगा के जलीय पर्यावरण को बेहतर बनाने के साथ भविष्य में मछुआरों की आजीविका को भी सहारा मिल सकता है।
