चार दशक से अधिक समय से चली आ रही जमीन की लड़ाई आखिरकार अदालत की चौखट से निकलकर संवाद और आपसी सहमति के जरिए समाप्त हो गई। वर्षों तक मुकदमे, तारीख और कानूनी पेचीदगियों में उलझे दोनों पक्षों ने बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से विवाद का स्थायी समाधान निकाल लिया। इस उल्लेखनीय पहल के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ट नारायण शुक्ल, उनके पुत्र अधिवक्ता विकास शुक्ला तथा दोनों वादकारियों मंगला प्रसाद तिवारी और सूर्यमणि चौबे को सम्मानित किया गया।

गांधी जयंती के अवसर पर जिला न्यायालय परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्वावधान में आयोजित ‘विवाद से संवाद तक’ संगोष्ठी में यह सम्मान प्रदान किया गया। उच्च न्यायालय के निर्देश पर जिला न्यायाधीश सुशील कुमार शशि ने वरिष्ठ अधिवक्ता बशिष्ट नारायण शुक्ल, अधिवक्ता विकास शुक्ला व दोनों वादकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

मामला जलालपुर थाना क्षेत्र के ताला मझवारा गांव से जुड़ा हुआ था। वर्ष 1986 में ‘शोभा बनाम किशोर’ के नाम से शुरु हुआ मुकदमा चार दशक से अधिक समय तक चलता रहा। इस दौरान मुकदमे में सुनवाई, साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया के विभिन्न चरण आए, लेकिन विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो सका। लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद के समाधान के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता बशिष्ट नारायण शुक्ल और उनके पुत्र अधिवक्ता विकास शुक्ला ने पहल की। उन्होंने दोनों पक्षों को आपसी संवाद और मध्यस्थता के माध्यम से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया।

लगातार बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच वर्षों से बनी दूरी और विवाद की गांठ धीरे-धीरे खुलती गई और अंततः दोनों वादकारी आपसी सहमति से मुकदमा समाप्त करने पर राजी हो गए। इस मामले की खास बात यह रही कि विवाद के समाधान में पहल करने वाले अधिवक्ताओं के साथ-साथ विवाद समाप्त करने की सहमति देने वाले दोनों वादकारियों को भी सम्मानित किया गया। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि वर्षों तक न्यायालय में चलने वाले विवाद को संवाद और आपसी सहमति से समाप्त करना भी समाज के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।चार दशक पुराने विवाद के निस्तारण से जहां न्यायालय पर लंबित मुकदमे का बोझ कम हुआ, वहीं दोनों पक्षों के बीच वर्षों से चली आ रही कड़वाहट को भी विराम मिला। मामला वैकल्पिक विवाद समाधान की प्रभावशीलता का उदाहरण भी बना, जिसमें न्यायालय के अंतिम निर्णय के बजाय संवाद, समझ और सहमति के माध्यम से विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला गया।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जिला न्यायाधीश सुशील कुमार शशि ने कहा कि त्वरित एवं सुलभ न्याय की दिशा में ‘विवाद से संवाद’ की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है। न्याय का वास्तविक उद्देश्य केवल निर्णय देना नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द की पुनर्स्थापना करना भी है।कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्तागण एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
