दिल्ली में करीब 700 करोड़ रुपये के कथित मेडिकल उपकरण एवं दवा खरीद घोटाले की जांच में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी राजीव कुमार रंगीला को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय से फरार चल रहा रंगीला ACB के सामने सरेंडर किया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। जिसे अदालत में पेश किए जाने के बाद चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। जांच के अनुसार, राजीव रंगीला पर मेडिकल उपकरणों की सरकारी खरीद प्रक्रिया को कथित तौर पर प्रभावित करने और कई फर्जी अथवा शेल कंपनियों के माध्यम से कारोबार संचालित करने का आरोप है।

जांच एजेंसी का दावा है कि कागजों पर इन कंपनियों के मालिक अलग-अलग लोग थे, जबकि उनका वास्तविक संचालन रंगीला से जुड़ा हुआ था। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ कंपनियों के मालिक के रुप में उसके नौकरों और चाय बेचने वाले लोगों तक के नाम इस्तेमाल किए गए। मामले की जांच में एफ मेड डिवाइसेज, टेक्नोक्रेट्स, राज श्री, आशी सर्जिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स और एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं। ACB के आरोपों के मुताबिक, कुछ मेडिकल उपकरणों के निर्माताओं के साथ कथित मिलीभगत कर टेंडर की तकनीकी शर्तें तैयार की गईं, ताकि निर्धारित कंपनियों को सरकारी आपूर्ति के आदेश हासिल हो सकें। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि टेंडर प्रक्रिया में किन अधिकारियों, निर्माताओं और बिचौलियों की भूमिका रही।

एक जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि शुरुआत में केवल दो पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद से जुड़ी प्रक्रिया बाद में 448 मशीनों की आपूर्ति तक पहुंच गई। इसके अलावा सीआर रेडियो, एनेस्थीसिया मशीन और अन्य चिकित्सा उपकरणों की खरीद में भी कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है। मामला दिल्ली सरकार के अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के लिए दवाओं, वैक्सीन और मेडिकल उपकरणों की खरीद से जुड़ी सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) तथा डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) की खरीद प्रक्रिया से संबंधित है। शिकायतों के बाद विजिलेंस विभाग की कार्रवाई से जांच आगे बढ़ी और ACB ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरु की।मामले में इससे पहले CPA के हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा, पूर्व DGHS प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल और डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है। एजेंसी अब रंगीला से कथित कंपनियों के नेटवर्क, टेंडर प्रक्रिया, वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर पूछताछ करेगी।

सूत्रों के मुताबिक, रंगीला जून से जांच एजेंसी की पकड़ से बाहर था। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर और गैर-जमानती वारंट जैसी कार्रवाई की गई थी। एजेंसी के मुताबिक वह अमेरिका भी गया था और भारत लौटने के बाद ACB के सामने सरेंडर किया।राजीव रंगीला को फार्मास्युटिकल कारोबारी बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार उसने 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी लड़ा था, हालांकि वह चुनाव नहीं जीत सका।ACB की जांच अभी जारी है। ऐसे में कंपनियों के वास्तविक नियंत्रण, सरकारी खरीद से जुड़े भुगतान और कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका को लेकर आने वाले समय में और जानकारी सामने आने की संभावना है।
