मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रहा विवाद शनिवार को और गहरा गया। एक ओर विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ मोर्चा तेज करते हुए पद से हटाने की मांग उठाई है, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने शनिवार को हुई फुल कमीशन बैठक के बाद SIR को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तृत सफाई दी। आयोग ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

शनिवार को दोपहर तीन बजे नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में फुल कमीशन की बैठक हुई। इसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी शामिल हुए। यह बैठक ऐसे समय हुई जब चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद और SIR से जुड़े फैसलों पर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर रिपोर्टें सामने आई थीं। बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR शुरु करने का आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और बाद के कार्यक्रमों को भी सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। आयोग ने यह भी कहा कि मूल SIR आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश में बरकरार रखा था।SIR के दौरान जिन मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस जारी हुआ है, उन्हें हर मामले में ERO/AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरुरत नहीं होगी। आयोग के अनुसार बूथ लेवल अधिकारी (BLO) ऐसे मतदाताओं के घर जाकर जरुरी दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे। केवल असाधारण परिस्थितियों में सुनवाई होगी और आयोग ने ऐसी सुनवाई को संभव होने पर ऑनलाइन कराने की बात कही है। जरलृरत पड़ने पर मतदाता की अनुमति से परिवार का कोई वयस्क सदस्य भी उसकी ओर से सुनवाई में शामिल हो सकेगा।

दिल्ली में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है, जबकि नोटिस, दावों और आपत्तियों के निस्तारण की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की तारीख 12 अक्टूबर और उनके निस्तारण की तारीख 10 नवंबर 2026 तक कर दी गई है। चुनाव आयोग ने ECINET को लेकर उठे सवालों के बीच इसकी समीक्षा का फैसला किया है। इसके लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।आयोग ने कहा कि इसका उद्देश्य यह देखना है कि ECINET संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरुप काम कर रहा है या नहीं। आगे से IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहल को आयोग की मंजूरी से पहले अधिकारियों की समिति में चर्चा के लिए रखा जाएगा।बैठक में आयोग ने अपने आंतरिक कामकाज को लेकर भी कई निर्णय किए हैं। अब आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले से प्रसारित किया जाएगा और बैठकों के मिनट्स जारी किए जाएंगे। अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट समय पर पूरी करने, अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी लेने और चुनाव आयुक्तों द्वारा अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।

इस विवाद का दूसरा बड़ा चेहरा राजधानी दिल्ली में दिखाई दिया। शुक्रवार को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को रोकने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। दिल्ली पुलिस के मुताबिक करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, CPI (ML) नेता दीपंकर भट्टाचार्य और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव शामिल थे। हिरासत में लिए गए लोगों को करीब रात 8 बजे छोड़ दिया गया। CEC के खिलाफ कांग्रेस का विरोध दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। 25 सितंबर को कांग्रेस ने कई राज्यों में प्रदर्शन किए। दिल्ली के अलावा जम्मू, बिहार, असम, चंडीगढ़, तेलंगाना और अन्य स्थानों पर भी प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आईं। कुछ स्थानों पर पुलिस ने बैरिकेडिंग, पानी की बौछार और अन्य तरीकों से प्रदर्शनकारियों को रोकने की कार्रवाई की। उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस ने CEC के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

विपक्षी दलों के बीच ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर आगे की रणनीति पर बातचीत तेज होने की खबर है। एक मीडिया चैनल की रिपोर्ट के अनुसार INDIA गठबंधन के नेता अगले सप्ताह बैठक और साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी कर रहे हैं तथा ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव को लेकर चर्चा चल रही है। ममता बनर्जी, राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के बीच इस मुद्दे पर बातचीत की भी रिपोर्ट है।वहीं, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर किए जाने की खबर है, जिसमें SIR और Form-6 से जुड़े कथित बदलावों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग का कहना है कि SIR और Form-6 से जुड़े प्रमुख फैसले आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं। कुल मिलाकर शनिवार की रात तक विवाद के दो स्पष्ट पक्ष सामने हैं। विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों ने SIR, मतदाता सूची और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं तथा CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज की है। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा है कि उसके प्रमुख निर्णय सामूहिक और सर्वसम्मत रहे हैं। शनिवार की बैठक के बाद आयोग ने एक तरफ SIR प्रक्रिया में मतदाताओं के लिए राहत के कदम उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ ECINET की समीक्षा और बैठकों के एजेंडे व मिनट्स सार्वजनिक करने जैसे प्रशासनिक बदलावों की घोषणा की है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR, Form-6, ECINET और CEC की भूमिका को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस और तेज होने के आसार हैं।
