प्रतिबंधित मांझे पर कठोर कानून की मांग, डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

Akhlaque Khan
Akhlaque Khan Published on : September 10, 2026 12:53 am
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एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद नहीं थम रहा जानलेवा मांझे का कहर, अधिवक्ताओं ने कहा “पतंग उड़ती रहे, लेकिन किसी की जिंदगी न कटे”

जौनपुर।
अखलाक खान
समाचार एक्सप्रेस

प्रतिबंधित चाइनीज, नायलान, सिंथेटिक व नॉन-बायोडिग्रेडेबल मांझे से लगातार हो रही दुर्घटनाओं और मौतों को लेकर अधिवक्ता विकास तिवारी व अतुल सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन के जरिए प्रतिबंधित मांझे के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और उपयोग के खिलाफ कठोर एवं प्रभावी कानून बनाए जाने की मांग की गई।

ज्ञापन में कहा गया कि पतंग उड़ाना देश की परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन प्रतिबंधित एवं जानलेवा मांझा अब आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 11 जुलाई 2017 को नायलान, सिंथेटिक एवं गैर-बायोडिग्रेडेबल मांझे के निर्माण, बिक्री, भंडारण, खरीद और उपयोग पर रोक के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कई स्थानों पर इसकी बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। ज्ञापन में जौनपुर में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि 11 दिसंबर 2025 को शिक्षक संदीप तिवारी तथा 14 जनवरी 2026 को डॉ. समीर हाशमी की प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से मृत्यु हो गई। इसके अलावा पिछले दस महीनों में दो दर्जन से अधिक लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का दावा किया गया। वहीं 6 सितंबर 2026 को सुजल मौर्य और उनके भाई सानू मौर्य भी प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि 12 जनवरी 2026 को संबंधित अधिकारियों को प्रतिबंधित मांझे के संबंध में विधिवत नोटिस दिए जाने के बावजूद दो दिन बाद डॉ. समीर हाशमी की मृत्यु होना बेहद गंभीर विषय है। डीएम द्वारा प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि केवल कागजी आदेश और मौसमी अभियान पर्याप्त नहीं हैं। अधिवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि उनकी लड़ाई पतंग उड़ाने की परंपरा के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐसे जानलेवा मांझे के खिलाफ है, जो सड़क पर चलते किसी निर्दोष नागरिक की जान ले सकता है। उन्होंने कहा, “पतंग उड़ती रहे, लेकिन किसी की जिंदगी न कटे।”

ज्ञापन में प्रतिबंधित मांझे के निर्माण, परिवहन, बिक्री, भंडारण एवं उपयोग पर कठोर दंड का प्रावधान करने, इसके पूरे आपूर्ति तंत्र की जांच कराने, ऑनलाइन बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने तथा प्रत्येक थाना क्षेत्र में स्थायी निगरानी व्यवस्था बनाए जाने की मांग की गई। इसी क्रम में अतुल सिंह ने कहा कि अब किसी अगली मौत का इंतजार नहीं किया जा सकता। सरकार को प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए नागरिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। इस अवसर पर विकास तिवारी, अतुल सिंह, डॉ. अब्बासी, अंकित यादव, आशीष शुक्ल, सुधांशु सिंह, रंजीत यादव, भैया लाल यादव, देवेश मौर्य, नीरज पाठक सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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