उत्तर प्रदेश के लाखों उचित दर विक्रेताओं (कोटेदारों) के लिए राहत की खबर है। खाद्य एवं रसद विभाग ने ई-पॉस मशीन के माध्यम से राशन वितरण करने वाले कोटेदारों को अलग से स्थायी बिक्री रजिस्टर रखने की बाध्यता के संबंध में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग के अनुसार ई-पॉस मशीन से आधार प्रमाणीकरण के बाद होने वाले वितरण का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड पहले से ही सुरक्षित रहता है।

खाद्य एवं रसद विभाग के आयुक्त की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में करीब 99.80 प्रतिशत लाभार्थियों को ई-पॉस मशीन के माध्यम से आधार प्रमाणीकरण के बाद खाद्यान्न एवं आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया जा रहा है। ऐसे में ई-पॉस मशीन में दर्ज वितरण का विवरण सिस्टम इंटीग्रेटर द्वारा विकसित एमआईएस रिपोर्ट तथा एनआईसी, उत्तर प्रदेश की रिपोर्ट में सुरक्षित उपलब्ध रहता है।विभाग ने माना कि ई-पॉस मशीन के माध्यम से किए गए वितरण का रिकॉर्ड डिजिटल रुप से उपलब्ध होने के कारण अलग से स्थायी बिक्री रजिस्टर तैयार कर उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना व्यावहारिक नहीं है। इसी को देखते हुए ई-पॉस के जरिए होने वाले सामान्य वितरण के मामले में अलग से बिक्री रजिस्टर रखने की बाध्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है।

हालांकि, यह राहत सभी परिस्थितियों में लागू नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन या अपरिहार्य परिस्थितियों में जिलाधिकारी की अनुमति से यदि ई-पॉस मशीन के बिना मैनुअल तरीके से राशन वितरण कराया जाता है, तो उस स्थिति में संबंधित उचित दर विक्रेता के लिए बिक्री रजिस्टर तैयार करना अनिवार्य होगा। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश आवश्यक वस्तु (बिक्री एवं वितरण नियंत्रण का विनियमन) आदेश-2016 में स्टॉक रजिस्टर और बिक्री रजिस्टर के रखरखाव की व्यवस्था निर्धारित की गई है। वर्तमान डिजिटल व्यवस्था को देखते हुए शासन स्तर पर इस आदेश में आवश्यक संशोधन के लिए कार्रवाई शुरु किए जाने की बात भी कही गई है। इस स्पष्टीकरण से प्रदेश के उचित दर विक्रेताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ई-पॉस मशीन के जरिए होने वाले नियमित राशन वितरण का रिकॉर्ड पहले से ही विभागीय डिजिटल सिस्टम में सुरक्षित रहता है।
