उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पिता महेंद्रनाथ की जमीन को कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के अमीखानपुर गांव में स्थित करीब 90 बीघा जमीन में से 26 बीघा भूमि को लेकर फर्जीवाड़े का आरोप है। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लेखपाल समेत दो नामजद आरोपियों की तलाश की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, कमलनाथ ने अपने पिता की जमीन पर उत्तराधिकार दर्ज कराने के लिए 18 मई 2026 को नजीबाबाद तहसीलदार न्यायालय में आवेदन किया था। प्रक्रिया के दौरान जमीन से संबंधित रिकॉर्ड में विवाद सामने आया। जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसी वसीयत सामने आई, जिसके आधार पर धर्मपाल सिंह ने जमीन पर अपना अधिकार जताने का प्रयास किया था। मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य कथित मृत्यु प्रमाणपत्र को लेकर सामने आया। कमलनाथ की शिकायत के मुताबिक उनके पिता महेंद्रनाथ का निधन 7 सितंबर 2004 को दिल्ली में हुआ था, जबकि जांच में सामने आए कथित मृत्यु प्रमाणपत्र में उनकी मृत्यु की तारीख 10 अप्रैल 2003 दर्ज बताई गई है। पुलिस इसी दस्तावेज और कथित फर्जी वसीयत की भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस के मुताबिक मामले में हल्का लेखपाल डेविड कुमार समेत चार लोगों को नामजद किया गया है। आरोप है कि लेखपाल की रिपोर्ट में एक आरोपी को संबंधित जमीन का काश्तकार बताया गया था। पुलिस अब राजस्व अभिलेखों और लेखपाल की रिपोर्ट की भी जांच कर रही है। मामले में धर्मपाल सिंह निवासी महावतपुर बिल्लौच और विजय शंकर पांडेय को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में विजय शंकर पर कथित वसीयत तैयार करने में भूमिका होने की बात सामने आई है।

वहीं जसविंदर सिंह ढिल्लो और हल्का लेखपाल डेविड कुमार की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच के साथ फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के अनुसार, कमलनाथ की शिकायत के आधार पर नजीबाबाद थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस कथित वसीयत, मृत्यु प्रमाणपत्र, राजस्व अभिलेख और संबंधित न्यायालयी दस्तावेजों की जांच कर रही है। मामले में अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और दस्तावेजों की वास्तविकता, आरोपियों की भूमिका की जांच पूरी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
