UPI के जरिए डिजिटल भुगतान देश के व्यापार और आम जनजीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक बड़ी संख्या में लोग डिजिटल भुगतान पर निर्भर हैं। ऐसे में UPI लेनदेन से जुड़ी नई Merchant Discount Rate (MDR) व्यवस्था को लेकर व्यापारियों के बीच चिंता और इसके स्पष्ट क्रियान्वयन की मांग उठने लगी है।

समाजवादी पार्टी जौनपुर के जिला महासचिव आरिफ हबीब ने कहा कि सरकार के अनुसार व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वहीं 2,000 रुपए तक के पात्र व्यापारी भुगतान और निर्धारित शून्य-MDR श्रेणी में आने वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि निर्धारित व्यवस्था के तहत 2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह शुल्क ग्राहकों से वसूलने के लिए नहीं है और इसका वहन संबंधित व्यापारी पक्ष करेगा। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की जानकारी सरकार और NPCI की ओर से दी गई है।

आरिफ हबीब ने कहा कि UPI को देशभर में लोकप्रिय बनाने में व्यापारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में नई व्यवस्था से यदि किसी भी रुप में छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत आती है तो उसके प्रभाव को लेकर पहले से स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को MDR के नियमों, पात्रता और शुल्क की जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि भ्रम अथवा गलत वसूली की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने सरकार से मांग की कि UPI भुगतान व्यवस्था को व्यापारियों के लिए सरल, पारदर्शी और न्यूनतम लागत वाली बनाए रखने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही छोटे और मध्यम कारोबारियों को किसी अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाने के लिए स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान किए जाएं। श्री हबीब ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था की सफलता के लिए ग्राहक, व्यापारी, बैंक और भुगतान सेवा प्रदाताओं के हितों के बीच संतुलन जरुरी है। उन्होंने सरकार से व्यापारिक संगठनों और कारोबारियों के साथ संवाद कर व्यवस्था को और स्पष्ट बनाने की मांग की।
