डेटिंग ऐप के जरिए युवकों को अपने जाल में फंसाकर क्लब में बुलाने और वहां कई गुना बढ़ा हुआ बिल वसूलने के कथित मामले का गाजियाबाद क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान राहुल गुप्ता, मणिकांत शर्मा उर्फ अमन शर्मा, मोहित और विशाल राजपूत के रुप में हुई है। मामले में एक महिला साथी के फरार होने की बात भी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी डेटिंग ऐप्स पर युवतियों के नाम और फोटो से फर्जी प्रोफाइल तैयार करते थे। इसके बाद युवकों से दोस्ती कर चैटिंग के जरिए उन्हें विश्वास में लिया जाता था। बातचीत आगे बढ़ने पर मुलाकात के बहाने उन्हें गाजियाबाद के राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (RDC) स्थित ‘लॉर्ड ऑफ विंग्स’ क्लब में बुलाया जाता था।क्लब पहुंचने पर युवक की मुलाकात किसी युवती से कराई जाती थी। इसके बाद खाने-पीने की कई चीजों के साथ महंगे पेय पदार्थ और हुक्का आदि का ऑर्डर कराया जाता था। पुलिस का आरोप है कि ऑर्डर की वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक रकम का बिल तैयार कर युवकों से भुगतान के लिए दबाव बनाया जाता था। पुलिस जांच में सामने आए एक मामले के मुताबिक, एक युवक को डेटिंग ऐप के जरिए बातचीत के बाद RDC क्षेत्र में बुलाया गया। वहां युवती उसे क्लब ले गई और खाने-पीने का ऑर्डर कराया। कुछ देर बाद करीब 36,277 रुपये का बिल सामने आया। युवक ने इतनी अधिक रकम देने से इनकार किया तो क्लब में मौजूद आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज और धमकी देकर भुगतान का दबाव बनाया। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित से कथित तौर पर कुछ रकम ऑनलाइन और कुछ नकद ली गई। इस मामले में पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरु की थी।

भुगतान से इनकार करने पर क्राइम ब्रांच के अनुसार, यदि कोई युवक बढ़ा हुआ बिल देने से इनकार करता था तो उसे कथित तौर पर डराया-धमकाया जाता था। पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ युवकों के वीडियो बनाए जाते थे और बाद में उन्हें वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने की धमकी देकर पैसे वसूलने का प्रयास किया जाता था। यह पूरा नेटवर्क लगभग एक महीने से सक्रिय था और इसी तरीके से कई लोगों को निशाना बनाया गया। कथित तौर पर वसूली गई रकम को आरोपियों के बीच बांटा जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कुल कितनी रकम की वसूली की गई।क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन और सुजुकी फ्रॉन्क्स कार बरामद की है। पुलिस इन उपकरणों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर गिरोह से जुड़े लोगों तथा कथित लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।

गिरफ्तार आरोपियों में शामिल मणिकांत के खिलाफ वर्ष 2024 और 2025 में भी इसी तरह की धोखाधड़ी से जुड़े दो मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब पुराने मामलों और मौजूदा प्रकरण के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है। क्राइम ब्रांच अब इस बात की जांच कर रही है कि फर्जी प्रोफाइल बनाने में किन मोबाइल नंबरों और उपकरणों का इस्तेमाल हुआ, पीड़ितों से कितनी रकम वसूली गई और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। फरार महिला साथी की तलाश के साथ-साथ क्लब में कथित वसूली के पूरे नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
