बहन के इलाज के नाम पर सोशल मीडिया पर पैसे जुटाने का आरोप, पत्रकार की शिकायत के बाद युवक गिरफ्तार

आगरा में जय सिंह राठौर पर बीमारी का दावा कर लोगों से आर्थिक मदद लेने का आरोप, आई सेंटर से मरीज के इलाज की जानकारी न मिलन

Akhlaque Khan
Akhlaque Khan Published on : September 25, 2026 4:23 am
बहन के इलाज के नाम पर सोशल मीडिया पर पैसे जुटाने का आरोप, पत्रकार की शिकायत के बाद युवक गिरफ्तार
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बहन के इलाज के नाम पर सोशल मीडिया के माध्यम से आर्थिक मदद जुटाने के मामले में आगरा पुलिस ने जय सिंह राठौर नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बहन के गंभीर नेत्र रोग से पीड़ित होने की बात कहते हुए लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील की थी। इसके बाद कई लोगों ने उसके खाते में रकम भेजी।

मामले का खुलासा पत्रकार मदन मोहन सोनी की शिकायत के बाद हुआ। बताया गया कि राठौर ने अपनी पोस्ट में दावा किया था कि उसकी बहन ग्लूकोमा और विट्रियस हेमरेज जैसी बीमारी से पीड़ित है और उसकी आंखों की रोशनी जाने का खतरा है। इस अपील के बाद लोगों ने इलाज में मदद के लिए आर्थिक सहयोग करना शुरु किया। मामले में पत्रकार मदन मोहन सोनी ने उस आई सेंटर से संपर्क किया, जहां राठौर ने अपनी बहन का इलाज चलने की बात कही थी। शिकायत के अनुसार, सेंटर की ओर से कथित तौर पर बताया गया कि वहां इस नाम का कोई मरीज इलाज के लिए दर्ज नहीं है। इसके बाद मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई की गई और पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरु की। जांच के बाद पुलिस ने जय सिंह राठौर को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की जांच में सोशल मीडिया पर किए गए दावे, आर्थिक मदद की अपील और संबंधित लेनदेन समेत अन्य बिंदुओं को देखा जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि अपील के बाद कितने लोगों ने रकम भेजी और कुल कितनी धनराशि एकत्र हुई।मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर बीमारी और इलाज के नाम पर आर्थिक मदद मांगने वाली अपीलों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इस तरह के मामलों को लेकर यह चिंता भी सामने आती रही है कि यदि बीमारी या इलाज के नाम पर गलत जानकारी देकर आर्थिक मदद मांगी जाती है तो इसका असर वास्तविक जरूरतमंद मरीजों पर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में लोगों के लिए किसी अभियान में आर्थिक सहयोग करने से पहले संबंधित अस्पताल, संस्था या इलाज की जानकारी की स्वतंत्र रुप से पुष्टि करना उपयोगी हो सकता है।फिलहाल आगरा पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित तौर पर जुटाई गई रकम कितनी थी, उसका इस्तेमाल कहां किया गया।

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