परीक्षा में कथित नकल पकड़ने वाले प्रोफेसर पर दलित उत्पीड़न अधिनियम में केस, छात्र की मौत के बाद बढ़ा विवाद

Akhlaque Khan
Akhlaque Khan Published on : September 21, 2026 8:32 am
परीक्षा में कथित नकल पकड़ने वाले प्रोफेसर पर दलित उत्पीड़न अधिनियम में केस, छात्र की मौत के बाद बढ़ा विवाद
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आईआईटी बॉम्बे में परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और कथित तौर पर ChatGPT के इस्तेमाल के मामले में पकड़े गए छात्र की मौत के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ दलित उत्पीड़न अधिनियम और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में केस दर्ज होने से विवाद गहरा गया है। पुलिस ने छात्र के पिता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है। प्रकरण की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की रिपोर्ट है।

मामला 18 सितंबर का बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक आईआईटी बॉम्बे के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। संस्थान के अनुसार, छात्र ने प्रश्नपत्र को AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर उत्तर हासिल करने की कोशिश की थी। प्रोफेसर डूला उस परीक्षा में निरीक्षक की भूमिका में थे। संस्थान का कहना है कि घटना के बाद छात्र से विभागाध्यक्ष और शिक्षक ने बातचीत की तथा उसे समझाया गया था।छात्र के परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि उसे जातिगत टिप्पणियों और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इन्हीं आरोपों के आधार पर प्रोफेसर समेत अन्य के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। हालांकि, इन आरोपों की अभी जांच चल रही है और उन्हें अदालत द्वारा सिद्ध नहीं किया गया है।

वहीं, आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि छात्र ने संस्थान के SC/ST सेल या प्रशासन के समक्ष इस संबंध में पहले कोई शिकायत नहीं की थी। दूसरी ओर, आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डूला के समर्थन में निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि उन्होंने परीक्षा में अपनी निर्धारित जिम्मेदारी निभाई थी।प्रोफेसर डूला आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े हैं। संस्थान की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से एमटेक और आईआईटी दिल्ली से पीएचडी की है। छात्र की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे परिसर में विरोध-प्रदर्शन भी हुए हैं। अब पूरे मामले में मुख्य सवाल यह है कि परीक्षा में हुई कथित अनियमितता, छात्र के साथ हुए व्यवहार और लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों के बीच वास्तविक घटनाक्रम क्या था। इसका निर्धारण पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना है।

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