शाही किला या जौनपुर किला? नए साइन बोर्ड ने छेड़ी नाम की नई बहस

ASI के नए बोर्ड पर ‘शाही’ शब्द गायब होने से उठे सवाल, कांग्रेस ने जताया विरोध, विभाग बोला- गजट में दर्ज नाम के अनुसार लग

Akhlaque Khan
Akhlaque Khan Published on : September 20, 2026 12:37 pm
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जौनपुर के ऐतिहासिक शाही किले के नए साइन बोर्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से लगाए गए नए साइन बोर्ड पर किले का नाम ‘जौनपुर किला’ दर्ज किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। लंबे समय से ‘शाही किला’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस ऐतिहासिक स्मारक के नाम से ‘शाही’ शब्द हटाए जाने को लेकर लोगों में चर्चा तेज है।

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि किले की पहचान जौनपुर की ऐतिहासिक विरासत के तौर पर ‘शाही किला’ के नाम से आम लोगों के बीच लंबे समय से रही है। ऐसे में नए साइन बोर्ड पर अलग नाम दर्ज होने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर नाम में बदलाव किस आधार पर किया गया? जौनपुर का यह ऐतिहासिक किला 14वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक के दौर से जुड़ा बताया जाता है। शर्की सल्तनत से लेकर ब्रिटिश शासन तक इस क्षेत्र ने कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं और सत्ता परिवर्तनों को देखा है। यही वजह है कि शाही किला जौनपुर की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब सदियों से इस स्मारक की पहचान ‘शाही किला’ के रूप में होती रही है तो नए साइन बोर्ड पर अचानक ‘जौनपुर किला’ नाम क्यों दर्ज किया गया?

साइन बोर्ड पर नाम को लेकर कांग्रेस के शहर अध्यक्ष आरिफ खान ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि ऐतिहासिक स्मारक की पहचान से जुड़े नाम में किसी भी तरह का बदलाव गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि जरुरत पड़ी तो इस मामले में कानूनी रास्ता भी अपनाया जाएगा।वहीं पुरातत्व विभाग की ओर से बताया गया है कि गजट नोटिफिकेशन में स्मारक का नाम ‘जौनपुर किला’ दर्ज है, इसी आधार पर नए साइन बोर्ड पर भी यही नाम लिखा गया है।हालांकि, विभाग के इस स्पष्टीकरण के बाद भी कई सवाल बरकरार हैं। यदि आधिकारिक अभिलेख में ‘जौनपुर किला’ नाम दर्ज है तो लंबे समय से प्रचलित ‘शाही किला’ नाम किस आधार पर इस्तेमाल होता रहा? और यदि परिसर में अलग-अलग समय पर लगाए गए साइन बोर्डों पर अलग-अलग नाम दर्ज हैं तो इसके पीछे आधिकारिक प्रक्रिया क्या रही है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या साइन बोर्ड पर अलग-अलग समय में अलग-अलग नाम दर्ज किए जाने को लेकर ASI की ओर से कोई आधिकारिक आदेश या प्रक्रिया निर्धारित है? यदि पुराने और नए बोर्ड पर अलग-अलग नाम हैं तो आखिर नाम में यह अंतर क्यों है?

फिलहाल नए साइन बोर्ड ने जौनपुर में ऐतिहासिक विरासत की पहचान और आधिकारिक नाम को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें एसआई के आधिकारिक स्पष्टीकरण और उपलब्ध अभिलेखों पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि स्मारक का आधिकारिक नाम क्या है और ‘शाही किला’ नाम के प्रचलन का आधार क्या रहा है।

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