उत्तर प्रदेश में पिछले करीब 15 दिनों से चल रहे बिजली संकट से अब राहत मिलती दिखाई दे रही है। बीते 48 घंटे में प्रदेश की कई तापीय विद्युत परियोजनाओं की बंद यूनिटों से 2500 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन दोबारा शुरु हो गया है। इससे ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में रात के समय होने वाली लंबी बिजली कटौती में और कमी आने की संभावना है।

कोयला खदानों में पानी भरने से कोयला गीला होने, उपलब्धता प्रभावित होने और कुछ परियोजनाओं में तकनीकी खराबी के कारण बिजली उत्पादन पर असर पड़ा था। मांग की तुलना में उपलब्धता करीब तीन हजार मेगावाट तक कम होने के चलते ग्रामीण इलाकों में रात के समय तीन से चार घंटे तक बिजली कटौती की जा रही थी। अब अनपरा, हरदुआगंज और ओबरा की विभिन्न यूनिटों से करीब 1500 मेगावाट उत्पादन दोबारा शुरु हुआ। इसके बाद घाटमपुर और जवाहरपुर की एक-एक यूनिट से भी एक हजार मेगावाट से अधिक बिजली मिलने लगी। इससे प्रदेश की बिजली उपलब्धता में करीब एक हजार मेगावाट और इजाफा हो सकता है।
अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल के अनुसार बिजली की उपलब्धता में लगातार सुधार हो रहा है। उपलब्धता बढ़ने के साथ ही गांवों और कस्बों में रात की कटौती भी कम हुई है। उन्होंने कहा कि अगले एक-दो दिनों में स्थिति और बेहतर होने पर रात में कटौती की आवश्यकता नहीं रह जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण रात में कटौती करनी पड़ रही है, वहां दिन में अतिरिक्त बिजली देकर इसकी भरपाई की जा रही है। बिजली संकट के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में रात में तीन से चार घंटे की कटौती के साथ कुल आपूर्ति करीब 14-15 घंटे तक सीमित हो गई थी। अब तापीय परियोजनाओं की बंद यूनिटों के दोबारा चालू होने से बिजली उपलब्धता बढ़ रही है और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
